राजेन्द्र सिह रावत बी एस रावत मोरी, ✒
उतराखन्ड राज्य आन्दोलनकारी मंच की मांग को दर किनार करने वाली प्रदेश सरकारो के प्रति राज्यआन्दोलनकारीयौ का गुस्सा दिन दिन बढता जा रहा है! यह बात राज्य आन्दोलनकारी मंच के पूर्व अध्यक्ष राजेन्द्र सिह रावत ने प्रदेश अध्यक्ष वंशीधर भगत के सामने रखी, उन्होने कहा कि राज्य आन्दोलनकारी राज्य गठन के बाद यह मांग उठाते आरहे है! किन्तु कांग्रेस सरकार मे मुख्यमंत्री हरीश रावत ने यह मांग कुछ हद तक जायज मानते हुए, 3100,सौ,रू,आम चिन्हित आन्दोलनकारी के पेंशन समान मे दिए, जब कि ईस दिशा मे भी पंक्ति भेद कर दिया गया! जेल मे बन्द हो या एक दिन के लिए बन्द होने वाला आख़िर धारा को एक ही लगनी चाहिए, क्यौ कि यह उस वक्त एक विद्रोह था! यदि राज्य माननीय अटल जी के कारण अलग नहि होता तो आज भी एक दिन वाला या सात दिन वाला, उतराखन्ड राज्य आन्दोलनकारी योगी जैसै, मुलायम सिंह, जैसै कडे शासक की मार जेलने हुएे जेल की चक्कीयां पिसता हुआ नजर आता! जिस पर समान काम की समान मांग है, राज्यआन्दोलनकारी मांग रहे है! पहली मांग यह है, कि राज्य गठन के साथ ही 10/ आरक्षण कर कई लोगो को नौकरीयौ का लाभ मिला किन्तु उसके बाद ही यह निती बन्द कर दी गयी,क्षैतीज आरक्षण सभी को मिलना चाहिए था! किन्तु यह भी एक मिसाल बनकर राज्य आन्दोलनकारीयौ को मौजूदा सरकारों ने भिखमंगा का दर्जा देने पर मजबूर कर दिया है! प्रश्न यह सामने आता है, कि जो लोग इस आन्दोलन के दिलो जान से सडको कोर्यालयौ मे तोड फोड कर रहे थे! वह क्या राजद्रोही धारा का शिकार नहि होता, लिहाजा राजनैतिक रोटी सैकने वाले यह नेता अब भी भूल जांय कि जो त्यागी माताएें, प्रणेता समाज हित मे अपने आपका सर्वस्व भेट चढा सकतें है! वह अब भी वही हालात पैदा कर सकते हैं, जो कि राज्य प्राप्ति के समय हो चुके थे! ईसलिए राज्य आन्दोलनकारियौं की मांग को सरकार को सप्रेम मान लेना चाहिए?जिन आन्दोलनकारीकारियौ की वजह से आज नेता अधिकारी लूट खसोट के घर मे बैठक है! वह किस की बदौलत आज उतराखन्ड के जनमानस का अच्छा खासा दुरूपयोग किया जारहा हैं! अब राज्यआन्दोलनकारीयौ की दुसरी मुहिम तैयार हो चुकी हैं, जोकि आनेवाले पिडीयौं की पुन्ह मिसाल का दर्जा बनता दिख रहा है! कदाचित राज्य के राजनेता कहलाने वाले यह नेता ईस भूल को स्वीकारने के लिए भी तैयार रहै, कि सर्वाधिक जनआन्दोलन, त्यागी यंहा के लोग रहे है! यंहा के आंदोलनो के जन्मदाता तिलाडीकान्ड, श्री देव सुमन,गौरादेवी,सरीखो के साथ देश हित के लिए मर मिटने वाले बीर शहीदो की शहादत फिर मुकाम तक पंहुचाने के लिए प्रेरणा का स्रोत काफी होगा! राज्यआन्दोलनकारी हित में चार, मांगे, 10/ क्षैतीज आरक्षण ,विकलांग, बधिर,विधवा,विधूर,सहायक पेन्शन में दबदील करने , समान, पेन्शन, राज्य आन्दोलनकारीयौ को स्वतन्त्रता सेनानी का दर्जा देना? कोई भी सरकार के लिए गलत कदम नहि होगा!
उतराखन्ड राज्य आन्दोलनकारी मंच की मांग को दर किनार करने वाली प्रदेश सरकारो के प्रति राज्यआन्दोलनकारीयौ का गुस्सा दिन दिन बढता जा रहा है! यह बात राज्य आन्दोलनकारी मंच के पूर्व अध्यक्ष राजेन्द्र सिह रावत ने प्रदेश अध्यक्ष वंशीधर भगत के सामने रखी, उन्होने कहा कि राज्य आन्दोलनकारी राज्य गठन के बाद यह मांग उठाते आरहे है! किन्तु कांग्रेस सरकार मे मुख्यमंत्री हरीश रावत ने यह मांग कुछ हद तक जायज मानते हुए, 3100,सौ,रू,आम चिन्हित आन्दोलनकारी के पेंशन समान मे दिए, जब कि ईस दिशा मे भी पंक्ति भेद कर दिया गया! जेल मे बन्द हो या एक दिन के लिए बन्द होने वाला आख़िर धारा को एक ही लगनी चाहिए, क्यौ कि यह उस वक्त एक विद्रोह था! यदि राज्य माननीय अटल जी के कारण अलग नहि होता तो आज भी एक दिन वाला या सात दिन वाला, उतराखन्ड राज्य आन्दोलनकारी योगी जैसै, मुलायम सिंह, जैसै कडे शासक की मार जेलने हुएे जेल की चक्कीयां पिसता हुआ नजर आता! जिस पर समान काम की समान मांग है, राज्यआन्दोलनकारी मांग रहे है! पहली मांग यह है, कि राज्य गठन के साथ ही 10/ आरक्षण कर कई लोगो को नौकरीयौ का लाभ मिला किन्तु उसके बाद ही यह निती बन्द कर दी गयी,क्षैतीज आरक्षण सभी को मिलना चाहिए था! किन्तु यह भी एक मिसाल बनकर राज्य आन्दोलनकारीयौ को मौजूदा सरकारों ने भिखमंगा का दर्जा देने पर मजबूर कर दिया है! प्रश्न यह सामने आता है, कि जो लोग इस आन्दोलन के दिलो जान से सडको कोर्यालयौ मे तोड फोड कर रहे थे! वह क्या राजद्रोही धारा का शिकार नहि होता, लिहाजा राजनैतिक रोटी सैकने वाले यह नेता अब भी भूल जांय कि जो त्यागी माताएें, प्रणेता समाज हित मे अपने आपका सर्वस्व भेट चढा सकतें है! वह अब भी वही हालात पैदा कर सकते हैं, जो कि राज्य प्राप्ति के समय हो चुके थे! ईसलिए राज्य आन्दोलनकारियौं की मांग को सरकार को सप्रेम मान लेना चाहिए?जिन आन्दोलनकारीकारियौ की वजह से आज नेता अधिकारी लूट खसोट के घर मे बैठक है! वह किस की बदौलत आज उतराखन्ड के जनमानस का अच्छा खासा दुरूपयोग किया जारहा हैं! अब राज्यआन्दोलनकारीयौ की दुसरी मुहिम तैयार हो चुकी हैं, जोकि आनेवाले पिडीयौं की पुन्ह मिसाल का दर्जा बनता दिख रहा है! कदाचित राज्य के राजनेता कहलाने वाले यह नेता ईस भूल को स्वीकारने के लिए भी तैयार रहै, कि सर्वाधिक जनआन्दोलन, त्यागी यंहा के लोग रहे है! यंहा के आंदोलनो के जन्मदाता तिलाडीकान्ड, श्री देव सुमन,गौरादेवी,सरीखो के साथ देश हित के लिए मर मिटने वाले बीर शहीदो की शहादत फिर मुकाम तक पंहुचाने के लिए प्रेरणा का स्रोत काफी होगा! राज्यआन्दोलनकारी हित में चार, मांगे, 10/ क्षैतीज आरक्षण ,विकलांग, बधिर,विधवा,विधूर,सहायक पेन्शन में दबदील करने , समान, पेन्शन, राज्य आन्दोलनकारीयौ को स्वतन्त्रता सेनानी का दर्जा देना? कोई भी सरकार के लिए गलत कदम नहि होगा!

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