बडियार के विकास को बयां कर रही है बिरान पड़ी पटवारी चौकी, सड़क, स्वास्थ्य, पोस्ट ऑफिस जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित 8 गांवो की जनता को विकास का इंतजार

कैलाश रावत

 बडियार के विकास को बयां कर रही है वीरान पड़ी पटवारी चौकी । वर्ष 2002 - 3 में लाखों की लागत से बनी पटवारी चौकी आज वीरान पड़ी हुई है और इंतजार कर रही है कि कोई आए और इस चौकी को आबाद करें । सड़क, टेलीफोन ,हॉस्पिटल, बैंक जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित बडियार में विकास के नाम पर एक पटवारी चौकी है , वह भी वीरान पड़ी हुई है बडियार की दुर्दशा को देखकर एक बार उत्तरकाशी के जिला अधिकारी ने यहां पर अपना कैंप लगाया, कैंप में अधिकारी व नेता सब आए विकास के वादे भी किए गए, लेकिन जिलाधिकारी के चले जाने के बाद अधिकारी व नेता भी चले गए और बडियार के लोग विकास का इंतजार करते रहे ।जब जब चुनाव आते हैं नेता आते हैं विकास का वादा करते हैं और चुनाव समाप्त होने के बाद विकास फिर से अगले चुनाव का इंतजार करता है, ताकि कोई आए और विकास का वादा करें और बडियार की जनता विकास की उम्मीद में खुशी रहे ।कहने को तो बडियार में 3 ग्राम पंचायतें हैं लेकिन सड़क सुविधा से वंचित होने के कारण यहां के लोग आर्थिक रूप से समृद्ध नहीं हो पा रहे हैं । यहां आलू तो खूब होता है लेकिन आलू की कीमत से ज्यादा बाजा तक पहुंचाने में भाड़ा लग जाता है जिस कारण यहां का आलू बाजार में नहीं पहुंच पाता । यहां चोलाई भी खूब होती है लेकिन सड़क के अभाव में चौलाई का भी भाव नहीं मिल पाता है केदार कांठा पर्वत की तलहटी में बसा होने के कारण बढ़ियार पर्यटकों की पसदिंदा जगह हो सकती थी, लेकिन यहां ना सड़क है और जब सड़क नहीं है तो कोई होटल भी नहीं है और जब होटल नहीं है तो पर्यटक कहां आएंगे । यहां के लोग हर नेता व अधिकारी के चक्कर काट काट कर थक चुके हैं पर हर जगह से आश्वासन मिलता है और इसी आश्वासन के सहारे बडियार के लोग जी रहे हैं क्योंकि आश्वासन एक उमीद देता है कि विकास होगा ।विकास की उम्मीद में कई पीढ़ियां गुजर चुकी हैं पर विकास है कि बडियार की ओर आही नहीं रहा है ।



प्रकृति की गोद मे बसा है बड़ियार
प्रकृति के सुंदर गोद व केदार कांठा पर्वत के तलहटी में बसे बडीयार क्षेत्र के 8 गांव, जहां प्रकृति ने इन्हे सुंदरता दी है वहीं प्रदेश व केंद्र सरकार ने बड़ियार से मुह फेर रखा है,  आलम यह है कि अगर कोई बीमार हो जाए तो उसे पालकी  पर बैठा कर पूरे दिन भर में सरनोल पहुंचाया जा सकता है उसके बाद ही गाड़ी या अन्य साधनों से उसे बडकोट या पुरोला पहुंचाया जा सकता है, ऐसा नहीं है कि यहां सड़क बनाने के लिए प्रयास नहीं किए गए, प्रयास बहुत किए गए हैं, सड़क भी मंजूर हुई पर हमारे देश के कानून सड़क बनाने में आडे आ रहे हैं ।

 सड़क पोस्ट ऑफिस व बैंक के बगैर तो ग्रामीण रही ही रहे हैं लेकिन आज की लाइफ लाइन बन चुके टेलीफोन की जरूरत बडियार के लोगों को भी है जब कभी आसमान साफ होता है तो बडियार में भी टेलीफोन लग जाता है, अब बडियार के लोगों की मांग है उनके यहां टेलीफोन का टावर लगाया जाए ताकि वह कम से कम देश दुनिया में बसे हुए लोगों से संपर्क कर सकें ।

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