कपालभाति प्रणायाम का नित्य अभ्यास करने से शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं एवं रक्त शुद्ध होता है । फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है और श्वसन तंत्र स्वस्थ रहता है। By practicing Kapalabhati Pranayama regularly, toxins are removed from the body and blood is purified. The efficiency of the lungs increases and the respiratory system remains healthy.


कपालभाति प्राणायाम की एक विशेष श्वास तकनीक है, जिसमें तेजी से श्वास छोड़ने  और स्वाभाविक रूप से श्वास लेने  की प्रक्रिया की जाती है। "कपाल" का अर्थ है "मस्तक" और "भाति" का अर्थ है "प्रकाश या चमक"। इसका अभ्यास मानसिक स्पष्टता, ऊर्जा और शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ाने में सहायक होता है।


कपालभाति प्रणायाम का नित्य अभ्यास करने के लिए 

 सुखासन, पद्मासन या किसी आरामदायक मुद्रा में बैठे ।  रीढ़ की हड्डी सीधी रखें और हाथों को घुटनों पर ज्ञान मुद्रा में रखें।   गहरी साँस लेकर फिर तेजी से नाक के द्वारा साँस छोड़ें व पेट को अंदर की ओर खींचें। सांस को स्वाभाविक रूप से अंदर जाने दें व फिर सांस छोड़े। इस प्रक्रिया को 40 - 50 बार दोहराएं।   धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाकर 5 से 10 मिनट तक नियमित करते रहे ।

कपालभाति प्राणायाम को नियमित करने से


शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं एवं रक्त शुद्ध होता है ।त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनती है। 

 पेट की मांसपेशियाँ सक्रिय होती हैं, जिससे कब्ज, गैस और एसिडिटी की समस्या दूर होती है।  

मेटाबॉलिज्म बढ़ता है और अतिरिक्त चर्बी कम होती है।  

 श्वसन तंत्र मजबूत होता है, अस्थमा और एलर्जी में लाभ होता है।  

  एकाग्रता और याददाश्त बढ़ती है, नींद अच्छी आती है।  

 

 फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है और श्वसन तंत्र स्वस्थ रहता है।

 मस्तिष्क में ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ती है 


सावधानियाँ

कपालभाति प्रणायाम को खाली पेट या भोजन के 3-4 घंटे बाद करे ।गर्भवती महिलाएँ, हाई बीपी या हृदय रोगी डॉक्टर की सलाह के बाद ही  करें।  यदि चक्कर आए या असहज महसूस हो, तो तुरंत रुकें।


नियमित अभ्यास से कपालभाति के लाभ अधिक प्रभावी होते हैं और शरीर व मन स्वस्थ रहता हैं।


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