सावधान अगर अनिद्रा व डिप्रेशन से हैं परेशान। भूलने की बीमारी, काम में मन नहीं लगता व गला रहता हैं खराब तो नित्य करें भ्रामरी प्राणायाम। Be careful if you are suffering from insomnia and depression. If you have amnesia, don't feel like working and your throat is sore, then do Bhramari Pranayam daily.

 भ्रामरी प्राणायाम एक प्राचीन योगिक श्वास अभ्यास है, जिसका नाम भ्रमर (मधुमक्खी) की गुंजन ध्वनि पर रखा गया है। इसे करते समय मधुमक्खी जैसी आवाज़ निकाली जाती है, जिससे मन शांत होता है और तनाव कम होता है।



भ्रामरी प्राणायाम करने के लिए सुखासन, पद्मासन या किसी भी आरामदायक मुद्रा में बैठ जाए व रीढ़ को सीधी रखें। शरीर को ढीला छोड़ते हुए आँखें बंद कर लें।  अंगूठे और तर्जनी को मिलाकर घुटनों पर रखें।  अंगूठों से कान बंद करें, तर्जनी को माथे पर और बाकी उंगलियों को आँखों पर रखें।  गहरी सांस अंदर भरें।  मुंह बंद करके ओम्म्म या भ्रमर जैसी गुंजन करें। यह आवाज नाक से निकालें।  5-10 बार इस प्रक्रिया को दोहराएं।


भ्रामरी प्राणायाम करने से मन शांत होता हैं डिप्रेशन व एंग्जाइटी से राहत मिलती है।   याददाश्त ठीक होती हैं । रक्तचाप व हाई बीपी नियंत्रित होता है।  अनिद्रा की समस्या फायदेमंद है।   माइंड  रिफ्रेश होता हैं व थकान दूर होती है।   आवाज साफ होती है और थायरॉयड संतुलित होता है।  

भ्रामरी प्राणायाम नियमित अभ्यास से मन-शरीर को गहरी शांति प्रदान करता है। इसे सुबह खाली पेट या शाम को शांत वातावरण में करें।

Disclaimer: इस आलेख का उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी साझा करना है, जो विभिन्न माध्यमों पर आधारित है। नमो न्यूज  इन बातों के सत्यता और सटीकता की पुष्टि नहीं करता।

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