कुल्थी की दाल (Horse Gram) पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा में गुर्दे और पित्त की पथरी को कम करने के लिए उपयोग की जाती है। इसमें डाइयूरेटिक (मूत्रवर्धक) और लिथोट्रिप्टिक (पथरी को घुलाने वाली) गुण होते हैं, जो शरीर से अतिरिक्त कैल्शियम और ऑक्सलेट को बाहर निकालने में मदद कर सकते हैं।
कुल्थी की दाल और पथरी पर असर
1. मूत्र उत्पादन बढ़ाती है – यह पेशाब को बढ़ावा देती है, जिससे छोटे आकार की पथरी धीरे-धीरे निकल सकती है।
2. पथरी को घुलाने में सहायक – इसमें मौजूद कुछ प्राकृतिक यौगिक पथरी को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ने में मदद कर सकते हैं।
3. एसिडिटी और टॉक्सिन्स कम करती है – यह किडनी और मूत्राशय की सफाई में सहायक होती है।
कैसे करें सेवन?
कुल्थी का पानी: एक मुट्ठी कुल्थी की दाल रातभर भिगोकर सुबह इसका पानी पीना फायदेमंद हो सकता है।
कुल्थी की दाल: इसे नियमित रूप से उबालकर या सूप के रूप में सेवन किया जा सकता है।
कुल्थी का काढ़ा: 1 चम्मच कुल्थी को 2 कप पानी में उबालें और जब पानी आधा रह जाए तो इसे छानकर पिएं।
सावधानियां:
यदि पथरी बहुत बड़ी है, तो केवल कुल्थी की दाल से इसे खत्म करना मुश्किल हो सकता है।
अधिक सेवन से शरीर में ज्यादा गर्मी हो सकती है, इसलिए सीमित मात्रा में सेवन करें।
यदि पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
अगर आपकी पथरी बड़ी है या बार-बार यह समस्या होती है, तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी होगा।
Disclaimer: इस आलेख का उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी साझा करना है, जो विभिन्न माध्यमों पर आधारित है। नमो न्यूज इन बातों के सत्यता और सटीकता की पुष्टि नहीं करता।

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