पुरोला में धयाणियों की जातर से निकला स्पष्ट जनादेश । एक राय से हुआ साफा चलन से बाहर। जौनसार -बावर का लोकप्रिय परिधान डा़ठू अब बन गया महिलाओं का लोकप्रिय परिधान। A clear mandate emerged from the gathering of Dhayanis in Purola. One opinion made Safa out of trend. Jaunsar - Bawar's popular garment Dathu has now become a popular garment for women.

गजेंद्र सिंह चौहान, पुरोला 

पुरोला व बड़कोट तहसील के गांवों में विगत दो वर्षों में धयाणियों की जातर आयोजित की जा रही है। इन जातरों में गांव की धयाणियों के द्वारा अपने अपने गांव के इष्टदेवताओं को सोने - चांदी के आभूषण व छत्र भेंट किए जाते है।


इसके लिए बाकायदा ड्रेस कोड भी लागू किया जाता हैं, जातर में धयाणियों व रूइंटूडियो का बाकायदा एक ड्रेस कोड लागू किया जा रहा है। एक तरफ नौगांव प्रखंड के गोडर - खाटल व आंशिक रूप से मुंगर संती पट्टी में पारंपरिक जौनसारी पहनावा घाघरा, कुर्ता, वास्कट व डा़ठू  ड्रेस कोड में अहम रहे है। वह बडकोट तहसील के अंतर्गत मुंगर संती के कुछ गांवों को छोड़कर लगभग सभी गांवों में पारंपरिक धोती ड्रेस कोड का अहम हिस्सा रहा है। वहीं कुछ गांवों में वास्कट के स्थान पर हाफ स्वेटर महिलाओं के परिधान का हिस्सा बने हैं। लेकिन एक बात आमतौर पर लगभग सभी गांवों में देखा गया कि जो साफा एक समय संपूर्ण रंवाई की महिलाओं की पहचान था वो अब अतीत बन गया है व धयाणियों की जातर से जौनसार बावर का लोकप्रिय परिधान डा़ठू अब आधिकारिक परिधान बन गया है।

हाल ही में पोरा, पुजेली व चंदेली में सम्पन्न धयाणियों की जातर में इष्ट देवताओं को सोने - चांदी के आभूषण भेंट किए गए व इन गांवों में भी उपरोक्त धोती, कुर्ता, स्वेटर/ वास्कट व डा़ठू ड्रेस कोड में शामिल रहे।

खैर धयाणियों की जातर के पावन महोत्सव पर आप सभी को नमो न्यूज की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं।

#नमोनारायण 



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