उत्तराखंड के दो राजनेता जिनपर नहीं लगते भ्रष्टाचार के आरोप । आखिर क्या खास हैं इन नेताओं में जो इनकी लोकप्रियता को रख रही हैं बरकरार। आज की कबर स्टोरी में उत्तराखंड को भ्रष्टाचार के दलदल में झोंकने वाले शासकों पर एक परिचर्चा । Two politicians of Uttarakhand who do not face corruption charges. After all, what is special about these leaders that is keeping their popularity intact? In today's Kabar Story, a discussion on the rulers who plunged Uttarakhand into the quagmire of corruption.

 गजेंद्र सिंह चौहान 

उत्तराखंड राज्य अपनी स्थापना के समय से ही भ्रष्टाचार के दलदल में फंसता चला गया है। बात उत्तराखंड के प्रथम मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी की हो या सर्वाधिक लोकप्रिय मुख्यमंत्री रहे जनरल खंडूरी। हर मुख्यमंत्री के शासन में भ्रष्टाचार फला व फूला है। राज्य स्थापना से अबतक जितने भी विधायक हुए है सभी पर भ्रष्टाचार के गम्भीर आरोप लगने के बावजूद उनकी लोकप्रियता में भारी इजाफा हुआ है। यानी कि जिस राजनेता को जनता जितना भ्रष्ट मानती अमुक नेता जनता के बीच लोकप्रिय होता जा रहा है। भ्रष्टाचार के आगे उत्तराखंड की जनता इतनी बेबस हो चुकी है कि भ्रष्टाचार की बात करने वालों को यहां सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता है। यहां मंत्री हो या संत्री सब भ्रष्टाचार के हमाम में नहाकर जन सेवक बने बैठे हैं।


भ्रष्टाचार की हद यहां तक हैं कि अगर आपकी नजर टूटी हुई है, खेत सुख गए हैं तो पहले आपको चढ़ावा चढ़ाना होगा तभी आपकी नजर ठीक होगी । उत्तराखंड का चाहे पूर्व मुख्यमंत्री हो, मंत्री हो, विधायक हो या वर्तमान के मंत्री संत्री जनता के नजर में ये महाभ्रष्टाचारी के साथ महानायक भी हैं। क्योंकि उत्तराखंड की जनता के दिलों दिमाग में यहां के भ्रष्ट नेता व अधिकारी ये बात फिट करने में कामयाब हुए हैं कि भ्रष्टाचार से राष्ट्र का निर्माण होता है।

सवाल ये उठता है कि यहां की जनता भ्रष्टाचार को इतना क्यों पूजते है? यहां के नेता इतना धन क्यों इकठ्ठा करते है। तो उसका सबसे बड़ा कारण है कि यहां छोटा चुनाव लड़ने के लिए एक करोड़ रुपए चाहिए । विधायक बनने के लिए तो 20 करोड़ से ऊपर का काला धन आपके पास होना चाहिए, नहीं तो आपको ढूंढने पर भी कार्यकर्ता नहीं मिलेंगे ।

इसका एक ज्वलंत उदाहरण आजकल खुद मेरे साथ भी देखने को मिल रहा है, जबसे मैने आगामी नगर पालिका अध्यक्ष पुरोला चुनाव लड़ने का ऐलान किया है तब से हर कोई मुझसे एक ही बात कर रहा है, क्या आपके पास डेढ़ करोड़ है?

जब हर कोई डेढ़ करोड़ दिखाने की मांग कर रहा हो तो आदमी क्या करे । अब लोगों को मेरे विजन से कोई मतलब न हो, भ्रष्टाचार को गले लगा चुके लोगों को सिर्फ डेढ़ करोड़ के दर्शन करने है।

इन्हीं सब बातों के मद्देनजर मैने अपने सभी बैंक खातों की स्टेटमेंट साथ में रख ली है, अब कोई डेढ़ करोड़ की बात करता है तो मै उसे बैंक खातों की स्टेटमेंट दिखा देता हु व साथ में ये भी कहता हूं कि जिस दिन मै नामांकन करूंगा ये डेढ़ करोड़ आप लोगों के सम्मुख रख दूंगा ।

खैर भ्रष्टाचार के गहरे दलदल में फंसते उत्तराखंड में उम्मीद की किरण अभी भी बाकी है। यहां विपक्षी दल कांग्रेस के पास दो ऐसे नेता है जो फ्रंटफुट पर खेलने की पूरी कोशिश तो करते है किंतु खुद की ही पार्टी में हाशिए पर धकेल दिए जाते है। पार्टी के भीतर भीतरघात के शिकार ये दो नेता राजनीति में कायम हैं तो सिर्फ एक वजह से है। इन दोनों नेताओं के बारे में एक बात काफी सुनी जाती हैं कि ये किसी भी कार्यकर्ता से न तो झूठ बोलते है ओर न ही काम के बदले में किसी कार्यकर्ता से पैसे की मांग करते हैं। खैर यहां हम बात कर रहे है पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल व प्रीतम सिंह की ।

उपरोक्त दोनों नेताओं की लोकप्रियता में भ्रष्टाचार का दामन कही नहीं सुना जाता हैं। यही कारण है कि समय समय पर पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के बावजूद दोनों नेता अधिक समय तक उक्त जिम्मेदारीयो का निर्वहन नहीं करते । खैर मकसद किसी भी नेता की बुराई करने का नहीं किन्तु भ्रष्टाचार के दलदल में फंसे नेताओं की वजह से उत्तराखंड की जनता के भविष्य के निर्माण के लिए अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, उच्च शिक्षा संस्थान, अच्छी सड़के व अच्छी नहीं बनने की अपेक्षा यहां नदी नालों में बाढ़ सुरक्षा कार्य किए जा रहे है। हमारा उद्देश्य होना चाहिए कि हम उत्तराखंड के भविष्य को नदी नालों में न बहने दे अपितु भविष्य के लिए ऐसे संस्थानों का निर्माण करे जिससे रोजगार के तमाम अवसर पैदा हो व भारत समृद्ध राष्ट्र बने ।

जय हिंद

#नमोनारायण 

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