गजेन्द्र सिंह चौहान पुरोला
नगर पालिका पुरोला के अध्यक्ष पद हेतु लंबे समय से काफी लोग जोर आजमाइश कर रहे थे। व्यापक जोर आजमाइश के साथ हर संभावित प्रत्याशी के जुबान पर एक ही नाम था ओर ओ था हरिमोहन नेगी। सब यही कहते थे कि हरिमोहन के खिलाफ एकता नहीं होगी तो ओ जीत जायेगा ।
हरिमोहन को हराने के लिए एक अन्य शस्त्र के उपयोग की तैयारी भी चल रही थी किंतु उसमें भी हरिमोहन विरोधियों में एकता नहीं थी। हरिमोहन को वित्तीय अनियमिताओं के आरोप में नगर पंचायत पुरोला के अध्यक्ष पद से बर्खास्त किया गया था। ऐसे में वे चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य भी करार दिए जा सकते थे । किंतु हरिमोहन विरोधियों से तीस साबित हो रहे हैं व मै नहीं मेरी पत्नी अभियान के अंतर्गत भ्रष्ट तंत्र का उन्हें फायदा मिला व अध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित हो गया। खैर दबी जुबान से आरोप ये लग रहे है कि हरिमोहन के साथ बीजेपी के एक बड़े नेता की दोस्ती है व इन दोनों की जुगलबंदी के तहत हरिमोहन की पत्नी किसी भी वक्त बीजेपी के टिकट पर अध्यक्ष पद की उम्मीदवार बन सकती है।
आइए अन्य उम्मीदवारों पर एक नजर डालते हैं, हम नगर के भीतर जिस भी मतदाता से बात करते है वे यही बात करते है कि एकता करो तभी हरिमोहन को हराया जा सकता हैं। खैर मैं नहीं मेरी पत्नी अभियान के तहत कोई भी पति अन्य पति के लिए एकता नहीं करना चाहता है।
ऐसे मै समाजसेवी मीना सेमवाल ने अपने समर्थक महिलाओं को एकजुट कर अध्यक्ष पद की दावेदारी पेश की है। यहां सवाल ये उठता है कि शेरनी बनकर अचानक दावेदारी पेश करने वाली मीना क्या हरिमोहन की पत्नी मोनिका को चुनौती दे पाएगी ।
अब सवाल ये उठता है कि अध्यक्ष का चुनाव लड़ने वाले व्यक्तियों का भाग्य जिन मतदाताओं के हाथ में है वो कौन है। तो यहां ये बताना जरूरी है कि नगर पालिका पुरोला के कुल मतदाताओं में से 50 प्रतिशत मतदाता यानी कि लगभग 2000 मतदाता मनरेगा श्रमिक हैं। यही नहीं यहां मनरेगा श्रमिक विभिन्न वार्डो में वार्ड मेंबर के लिए दावेदारी भी जता रहे हैं। अब आप सोच सकते है कि जिस नगर के प्रतिनिधियों का चयन किसी अन्यत्र ग्राम पंचायत में निवासरत मनरेगा श्रमिक करेगा वहां का जनप्रतिनिधि किसका विकास करेगा ।
सवाल ये उठता है कि इतनी संख्या में मनरेगा श्रमिक कैसे नगर पालिका पुरोला के मतदाता बने हैं? तो इसके पीछे यहां तैनात भ्रष्ट अधिकारियों का हाथ है जिन्होंने भारतीय संविधान की खुल्लम खुल्ला धज्जियां उड़ाई है। यहां स्पष्ट कर देना चाहता हु कि नगर का निवासी कितना भी गरीब क्यों न हो ओ किसी भी गांव में मनरेगा श्रमिक नहीं बन सकता है। तो फिर मनरेगा श्रमिक जो किसी गांव का निवासी होना चाहिए कैसे नगर पालिका पुरोला का मतदाता बना है।
#नमोनारायण

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