सतपुली, पूर्व लोकसभा प्रत्याशी यूकेडी डेमोक्रेटिक- प्रभारी चौबट्टाखाल विधानसभा इं० डीपीएस रावत ने गैरसैंण में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के द्वारा 2021_22 का बजट पेश करने पर सवाल खड़ा करते हुए इस बजट को महज चुनावी लुभावनी बजट बताया। जो पिछले 20 सालों से कांग्रेस बीजेपी रास्ट्रीय पार्टी यही करती आ रही हैं।
इं० डीपीएस रावत ने कहा , इस बजट से उतराखंड को लोगों को हर बार की तरह इस बार भी मायुशी ही हाथ लगी। बजट मे केवल डबल इंजन की सरकार ने आकड़ो की बाजीगरी दिख रही हैं। इसमे किसान, बेरोजगार और आम जनता के लिये कोई भी प्रावधान नहीं दिया गया पहाड़ी किसानों की आमदनी दोगुनी कैसे होगी? आने वाले 2024 के सांसद के आम चुनाव मे मोदी जी ने 2014, लोकसभा मे अपने भाषण मे भी दिया था कि सबकी आमदनी दो गुनी होगी!
इं० डीपीएस रावत ने कहा कि महगाई कैसे रुकेगी? उस बारे मे बजट मे साफ़ नहीं हैं। पिछ्ले 20 सालो से बीजेपी कांग्रेस ने योजनाओं के नाम पर भ्र्मजाल रचने का इतिहास रचा हैं। जिसका जबाब जनता अगर समझदार होगी तो 2022 मे देगी। पिछले 20 सालों मे बीजेपी कांग्रेस ने बजट के नाम पर पर सिर्फ बारी- बारी से प्रदेश को लूटा हैं। इस कांड मे सांसद बिधायक जिला पंचायत, सरकारी अधिकारी सभी सामिल हैं।
इं० डीपीएस रावत ने कहा कि रोजगार पर मुख्यमंत्री का बजट, भाषण और सिर्फ अपनी पीठ ठोकने तक ही सीमित बताया । इसके अलावा उन्होंने जोशीमठ आपदा में प्रशासनिक निकम्मेपन को भी आत्म प्रशंशा से ढकने की कोशिश की।
उत्तराखंड सरकार ने शिक्षा के लिए बजट कुल बजट का 16 प्रतिशत रखा जबकि, स्वास्थ के लिए उत्तराखंड सरकार द्वारा कुल बजट का 5 प्रतिशत बजट रखा गया वहीं पिछले साल के बजट पर भी सवाल उठाते हुए इंजीनियर डीपीएस रावत ने कहा,अभी तक पिछले साल के बजट का उत्तराखंड सरकार महज 54 प्रतिशत ही खर्च कर पाई ऐसे में ये 2021_22 का बजट सिर्फ भाषण तक ही सीमित दिखाई देता है ।
इसके अलावा इं० डीपीएस रावत ने कहा कि इन चार सालों में ऐसी को भी योजना सरकार परवान नहीं चढा पाई लेकिन मुख्यमंत्री ने अपने पूरे बजट भाषण में उनका ही गुणगान किया है, जिन योजनाओं की पोल पूरे प्रदेश में आए दिन खुल रही हैं। कोरोना महामारी के बाद आए इस बजट से प्रदेश की जनता बड़ी उम्मीदें लगाए हुई थी, लेकिन जनता के हाथ एक बार फिर निराशा लगी। कोरोना महामारी में प्रदेश के लाखों युवा बेरोजगार हुए हैं, पर्यटन उद्योग समेत छोटे-बड़े उद्यमियों का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
ऐसे में सरकार से एक मरहम लगाने की उम्मीद इस बजट से थी लेकिन इस बजट ने इस उम्मीद को ही तोड़ दिया है। यूकेडी डेमोक्रेटिक के युवा नेता इं० डीपीएस रावत बताया कि रोजगार से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि के क्षेत्र में इस बजट में कुछ भी नया नहीं है। हर क्षेत्र के लिए खाली जुमलेबाजी का सहारा लिया गया है। ना तो जन कल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त धनराशि का प्रावधान किया गया है ,और ना ही यह बताया गया है कि, पुरानी योजनाओं को पूरा करने के लिए पैसे कहां से आएगा।
राज्य की माली हालत दिन प्रति दिन खराब होती जा रही है, लेकिन त्रिवेंद्र सरकार यह बताने में नाकाम रही है कि राज्य के लिए नए आय के स्त्रोत कैसे बढ़ाए जाएंगे। इस बजट में न तो पिछली गलतियों से सबक सीखा गया है और न ही आने वाले कल को लेकर कोई विजन है। उन्होंने कहा कि इस बजट से जनता को झूठे चुनावी चाल 2022 में फंसाने की सरकार ने पूरी तैयारी की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री 4 साल तक सोए रहे और अब जनता को जब काम दिखाने की बारी आई तो अब जनता को झूठे सपने दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि गैरसैंण को नया मंडल बनाने की घोषणा भी की गई है जो सिर्फ एक जुमेलबाजी है और कुछ नहीं। उन्होंने कहा कि इससे पहले दो मंडल प्रदेश में थे लेकिन इन दो मंडल होने के बावजूद भी जनता के कितने कार्य पूरे हो पाए।
इं० डीपीएस रावत ने कहा कि सरकार को पूरे पहाड़ के विकास के लिये एक ही मंडल बनाना चाहिये, अगर पहाड़ मैदान करना हैं तो हरिद्वार उधम सिंह नगर जिलो को क्यों पहाड मे मिलाया हैं। यूपी सरकार ने 1994म मे कौशिक समिति मे पहाड़ी जिलो के हिसाब से अलग राज्य का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को दिया था।
ये सिर्फ जुमलेबाजी है और इस बजट से जनता को नाउम्मीदी ही हाथ लगी है। ये बजट जीरो वर्क सीएम का जीरो बजट है।
सरकार रोजगार स्वरोज़गार पर अपनी पीठ थप थापा रही है, पर आज भी प्रदेश में 8 लाख से ज्यादा युवा बेरोजगार हैं आज भी उत्तराखंड की गर्भवती महिलाएं सड़क पर जच्चा-बच्चा सहित दम तोड़ने को मजबूर हैं. जो सरकार महिलाओं के सुरक्षित प्रसव की गारंटी नहीं दे पायी, उससे स्वास्थ्य पर क्या उम्मीद की जा सकती है जबकि स्वास्थ्य सेवाओं के बुरे हाल हैं और त्रिवेंद्र सरकार सरकारी अस्पताल में सुविधा देने की बजाय इन अस्पतालों को प्राइवेट एजेंसियों को देने का काम कर रही है।
आज सरकार के पास अपने अधिकारियों को तनख्वा देने के लिये भी हर महीने केन्द्र के तरफ हाथ फैला रही हैं जरूरत से ज्यादा कर्मचारियों और विभागों को मर्ज करना चाहिये जिससे कि प्रदेश पर बोझ ना बढ़े और प्रदेश का विकास हो। नियत साफ़ नहीं रही हैं बीजेपी कांग्रेस की पिछ्ले 20 सालो से प्रदेश के हित मे!

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