नईदिल्ली, किसानों व सरकार के बीच कल हुई वार्ता बेनतीजा रही, इसी सन्दर्भ में ये सम्पादकीय आलेख खुद एक किसान होने के नाते लिख रहा हूँ ।
भारत मे मेरे जैसे न जाने कितने छोटे व निम्न दर्जे के किसान है जिनकी पीड़ा न कतिथ दिल्ली को घेरने वाले किसान जानते हैं व न सरकार जानती है ।
किसानों को मिलेगा एक लाख
मैं खुद एक किसान होने के नाते सरकार द्वारा किसानों के लिये चलाई जा रही सरकारी योजनाओं से पाला पड़ना लाजमी है , इसी कड़ी में सरकार द्वारा कृषि यंत्रों पर सबसीडी की बात बता रहा हु , सब्सिडी का गोरखधंधा इस कदर है कि 50 हजार बाजार भाव वालेे कृषि यंत्र की कीमत किसान को दुगुनी यानी एक लाख बता कर 80% सब्सिडी यानी 20 हजार में बेचा जा रहा है । अब देखो किसान खुस क्योकि 50 हजार की मशीन मिल गई 20 हजार में यानी लगभग आधी कीमत में , है न कमाल का अर्थशास्त्र ।
कंपनी व सरकारी अधिकारी खुस क्योंकि कम्पनी का माल बिना मोलभाव के बिक गया व अधिकारियों को सीधे बाकी के 50 हजार मिल गए
हर किसान को एक लाख प्रतिवर्ष है सम्भव
अगर सब्सिडी का खेल खत्म करके किसानों को उक्त धन सीधे किसानों को बांटे तो शायद हर किसान के हिस्से में एक लाख आयेंगे , इसमे एक बात ओर है अगर किसानों की सेवा के लिये रखें कर्मचारियों को किसी अन्य विभाग में ट्रांसफर कर दिया जाय तो शायद 1 लाख ओर किसानों के खाते में आ जाय ।
यानी कि प्रति किसान के खाते में सरकार 2 लाख रुपये हर वर्ष डाल सकती है अगर सरकार ठान ले कि भ्रष्टाचार के स्थान पर सिर्फ सेवा करनी है तो सम्भव है छोटे किसान खुसहाल बने ।
अंत मे दिल्ली को घेरने वाले किसानों के बारे में तो यही कहूंगा कि उनको पहले कानून को पढ़ना चाहिए व हम छोटे किसानों के जैसे जैविक उत्पाद तैयार करे ताकि उनको भी हमारे जैसे एमएसपी की जरूरत ही न पड़े ।

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