किसान आंदोलन की सफलता व असफलता निसन्देह कांग्रेस की डूबती नैया के लिये एक सहारा है । मरणासन्न हो चुकी कांग्रेस के लिये किसान आंदोलन ने संजीवनी बूटी का कार्य किया है । राहुल गांधी ने किसानों के सम्बंध में खूब ट्वीट किये जो कि खूब ट्रोल हुए ।
मोदी सरकार अगर कांग्रेस प्रयोजित किसान आंदोलन के आगे झुकती है तो ये कांग्रेस की जीत तो होगी ही मगर बीजेपी के लिए एक बहुत बड़ी मनोवैज्ञानिक हार होगी । जिसे कोई भी कार्यकर्ता पचा नही पायेगा ।
खालिस्तानी उग्रवाद जो कि खत्म हो गया था उसको भी इस आंदोलन से संजीवनी मिलेगी , क्योंकि इस आंदोलन में खालिस्तान आंतकी समर्थक कनाडा के प्रधानमंत्री भी कूद चुके हैं ।
इस आंदोलन के पीछे भारत विरोधी विदेशी ताकतों का हाथ है इस बात का प्रमाण कनाडा के खालिस्तान आंतकी समर्थक प्रधानमंत्री का बयान है जो इस आंदोलन के समर्थन में है
विदेशी ताकतों के साथ साथ इस आंदोलन से देशी आंतकी संगठनों जिनमे वामपंथी आंतकी संगठन प्रमुख हैं को भी एकजुट होकर अपनी ताकत दिखाने का मौका दिया है ।

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