उर्मिला चौहान ने नेत्रदान का संकल्प ले कायम की अनूठी मिशाल

 नेत्रदान का महादान करने वाली उर्मिला चौहान की फेसबुक वॉल पर 27 जुलाई को नेत्रदान पर उनके विचार 




“नेत्रदान” 

ये असाधारण कार्य करके मृत्यु के बाद भी इस धरा पर जीवित रहने का ऐसा मौका हर व्यक्ति को मिलता है,

परन्तु कितने लोग इस अलौकिक कार्य को अंजाम दे पाते है, इसका अन्दाजा आप सहज ही इस बात से लगा सकते है कि हमारे देश मे प्रतिदिन लाखो की संख्या मे दिवंगत लोगो में से महज लगभग 15 हजार पुण्यात्माओ द्वारा ही नेत्रदान किया रहता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण ही नही वरन हम करोड़ो भारतीयों के लिए शर्म की बात है। यदि साल भर में देश मे मरने वाले सभी लोगो द्वारा नेत्रदान किया होता, तो निसन्देह सभी नेत्रहीनों को आंखें मिल गई होती।

आंखों का महत्व तो हम सब जानते ही हैं, क्या कभी आपने महसूस किया है कि बिना रोशनी की अंधेरी दुनिया कैसी होती होगी, अगर नहीं तो एक दिन आंखें बंद करके या आंखों पर पट्टी बांध लीजिए और कल्पना कीजिए कि दैनिक जीवन में कैसे इस भयावह स्थित का सामना करते हैं।


  कुछ अभागे तो जन्म से नेत्रहीन पैदा होते हैं तो कुछ हादसे से और बीमारी से अपनी आंखें गवा देते हैं। अगर पुण्य कर्मो से अर्जित इस मानव जीवन मे हम नेत्रदान करते हैं व दूसरों को भी प्रेरित करने का प्रयास करे, तो काफी हद तक यह समस्या दूर हो सकती है, मगर हमारे समाज में व्याप्त धर्मान्ध रुढ़ीवादी भ्रांतियां नेत्रदान जैसे पुण्य कर्म में बाधक है। उन्हें लगता है कि अन्तिम संस्कार संपूर्ण अंगो के साथ होना चाहिए, मृत्युपरांत यदि शरीर का कोई अंग निकाल दिया जायेगा तो पुर्नजन्म मे दिव्यांग बनकर पैदा होगें, जबकि यह शरीर तो वैसे भी यहीं मिट्टी में मिल जाना है। सनातन धर्म तो सदैव कर्म को सर्वोच्च मानते हुऐ अच्छे कर्मों के निर्वहन किये जाने हेतु प्रेरित करता रहा है, फिर नेत्रदान जैसे पवित्र कर्म करने से कोई कैसे नेत्रहीन पैदा हो सकता है? क्या हुआ यदि हमारे पास दान देने के लिए अकूत सम्पत्ति नहीं हैं, नेत्रदान से हम ऐसा पुण्य अर्जित कर सकते है जिसमे जीते जी कुछ भी न खोकर मानवता को एक बेशकीमती उपहार देकर आजीवन सच्चे सुकून की अनुभूति कर सकते है। 

सरकार द्वारा अंगदान हेतु समय-समय पर शिविर आयोजित कराये जाते रहते है, परन्तु ढेड़ अरब आबादी वाले इस देश मे इसका कोई अपेक्षित सार्थक परिणाम सामने नही आ पाये है। इसलिए सरकार को ऐसे कार्यक्रमो के लिए व्यापक स्तर पर सामाजिक जनचेतना को जागृत किये जाने हेतु अधिक प्रयास किये जाने चाहिए। हमे भी जागरूक एवं सवेंदनशील बनना होगा, आगे आकर लोगों को प्रेरित करें तथा अपने क्षेत्र मे नेत्रदान शिविरो के आयोजन कराने के साथ-साथ नेत्रदान का संकल्प ले ताकि हमारी आंखों से कोई व्यक्ति इस खूबसूरत रंग बिरंगी दुनिया को देख सकें।।।।

 उर्मिला चौहान

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