पुरोला
सिंचाई विभाग पुरोला किस तरह से सरकार की आंखों में धूल झोंक रहा है इसका एक छोटा सा उदाहरण पुजेली नहर है, लगभग 30 वर्ष पहले जब ये नहर बनाई गई थी तब भी इसकी जरूरत नही थी लेकिन भ्रष्ट अधिकारियों ने सिर्फ अपने फायदे के लिए इस नहर के रूप में सरकारी धन को ठिकाने लगा दिया ।
लेकिन आज के अधिकारी पुराने अधिकारियो से भी 4 कदम आगे निकल व उन्होंने नाबार्ड के पैसो से इस सुखी नहर की मरम्मत करवा दी ।
यही नही देहरादून से प्रकाशित होने वाले पत्र में एक खबर भी छपवाई जिसमें किसानों की वर्षो की मुराद पूरी होते बताई गई , लेकिन सच्चाई तो ये है कि जिस नहर में कभी पानी चढ़ा ही नही उस नहर से किसानों के चेहरे कैसे खिल सकते हैं ।
पशु अस्पताल में किस तरह से लुटा जा रहा है गरीबो को ।
पुरोला ,नौगांव व बडकोट में चालान के नाम पर आए दिन पुलिस के हाथ लूट रही है गरीब जनता ।
पुरोला
चालान काटकर बेवजह परेसान करने वाले पुलिस कर्मियों के लिए बुरी खबर , पीड़ित को देना पड़ सकता है मुआवजा* ।
दिल्ली के एक वकील ने बिना मॉस्क अकेले कार चलाने पर 500 रुपये का चालान काटने पर सरकार से 10 लाख के मुआवजे की मांग की है ।
*पूरे घटनाक्रम पर एक नजर*
वकील सौरभ शर्मा ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है जिसमें उन्होंने बताया कि की 9 सितम्बर को वो अकेले अपनी कार से अपने कार्यालय को जा रहे थे कि उनकी कार को रोककर जबरदस्ती उनको चालान किया गया । उन्होंने बताया कि उन्होंने चालान काटने वाले अधिकारियों से कार में बैठे अकेले आदमी के लिए मॉस्क पहनने का कार्यादेश दिखाने को कहा तो ओ कुछ भी नही दिखा पाये ।।
शर्मा ने हाईकोर्ट से चालान रद्द कर उन्हें मुआवजा दिलाने की मांग की ।
उन्होंने कहा कि कोरोना की आड़ में आम जनता पर तरह तरह के जुल्म हो रहे हैं ओर इस तरह के ना जाने कितने प्रकार के चालान करके जनता को मजबूर किया जा रहा है ।

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