केदारकान्ठा पर्यटन विकास समिति बहुदेशीय कार्यकलापों को जायेगी!
बी,एस,रावत,
गडूगाड के लोगों द्वारा एक समिति का गठन कर क्षेत्र में केदारकांन्ठा पर्यटन के विकास को लेकर संपूर्ण क्षेत्र के लोगों ने खरसाडी मे बैठक कर समिति का गठन किया, खरसाडी जिवाणु मोटरमार्ग से पर्यटन हेतू होम स्टे कर पलायन रुकवाना नगदी फसलों की ओर जाना हॉर्टिकल्चर मिशन की और जाना जमीनी हकीकत कार्यों की ओर अनदेखी करने वाले विभागों को सही दिशा दशा की और लेजाना समिति गठन का मुख्य उद्देश्य है! समिति की परि कल्पना समिति के अध्यक्ष जयरामसिह मानते है, कि जब तक हम स्वयं नही जाग जाते तब तक कुछ नहीं होने वाला है! वास्तव मे मोरी विकास खण्ड का गडूगाड क्षेत्र विकास कि द्रिष्टिसे पिछड़ा जा रहा है! ईसके लिए यह समिति गठन ज़रूरी है,
क्या होगें मुख्य बिंदु
केदारगंगा नदी का केदारकान्ठा से रिस्ता व केदारकान्ठा काअसली माहत्मय को दरशाना, *केदारकान्ठा से उदगम करने वाली यह नदी ईस क्षेत्र की जिवनदायीनि रही है! यदि ईस के ईतिहास को देखाजाय तो अधिक लम्बा नही है, क्यौकि कुछ वर्षो पहले यंहा का चावल पर्वत के अलावा हिमाचलके क्वार् लेजाया जाता था! आज भी यंहा के लोगो ने यह खेती बरकरार रखी है ! बहर हाल अब यह चावल कि डिमांड घर पर ही मिलजाती हैं! अपने तीस कि, मी मार्ग को प्रशस्त करने के बाद यह नदी टौन्स नदी मे मोरी बाजार के निकट मिल जाती हैं! लेकिन अपने दोनों किनारे की जनता की झोली को भर देने वाली यह केदारगंगा ने न कभी सूखे न भूखे अपने लोगो को सुलाया! अपितु अन्न के पूरे भण्डार ईस नदी ने आज तक भी कायम रखे हैं, जो कि प्रमाणिक सत्य देखा जा सकता है! कुल मिलाकर यंहा के बुद्धि जिवी लोगो का कहना है, केदारगंगा नदी हमारे लिए केदारकान्ठा के केदारेश्वर भगवान का बरदान है! यह छोटा परिचय यंहा के बुद्धि जिवीयौ केद्वारा है! ईस लिए पहला कार्य ।
*केदारगंगा नदी का सौन्दरीकरण, मत्स्य जल क्रिडा की और सरकार का ध्यान दिलाना,
नदी को संरक्षित रखने के उपाय, जल बढ़ोतरी करने वाले वनस्पति लगवाना, *बढतेपलायन को रोकने के लिए नगदी जैविक फल सब्जी को बढावा देना! *पर्यटन को बढावा देने वाली सरकारी मनसूबे को रोजगारपरक बनाने वाली कार्य योजना को सरकार के सामने लाकर अम्लीजामा पहनाना, यंहा के लोग खरसाडी से देवजानी केदारकान्ठा पर्यटक जोन चाहने की एक वजह देखे यह एक रोचक विषय है, सरकार का एक मत्स्य विभाग भी है, जिसे मत्सय क्रिडा पर्यटक अपना शौक मानते हैं! यह जोन जंहा खेती किसानों की भाग्य रेखा केदारगंगा बौदाऊगाड बैनोलखड है वंही यह मत्सय पालन के लिए मोरी से देवजानी तक ग्रामीणो की दोहरी आर्थिकी का स्रोत बनजायेगी, बहर हाल मत्सय निदेशालय ने यह पहलू अपनी नजर मे पहाड के छोटे पानी भरे गाड गदेरो को ईस से दूर रख बडी नदीयौ मे टौन्स पावर यमुना सहित उतराखण्ड की कई बडी नदी शामिल की गयी हैं! जिन पर पिछले वर्ष बैनोल से मोरी तक, सनैल से काष्ठा, यमुना नदी के टेन्डर समुहो को दिलाने की कबायत जो कि समुहो द्वारा ईस मे भाग न लेकर मत्सय विभाग की जल क्रिडा मत्स्य संरक्षण की नाकामयाबी रही! इस सन्दर्भ मे बी, एस, रावत, द्वारा निदेशक मत्स्य उतराखन्ड को छोटे गाड गदेरो को भी ईस परियोजना मे शामिल करने का सुझाव दिया गया था! छोटी गाड गदेरो मे यंहा मौताड बौदांऊगाड बैनोल खड, जिन पर मत्सय क्रिडा की अपार संभावनाए है! *
यह होगी प्रारम्भिक मांगे! *खरसाडी जिवाणु मोटरमार्ग को लो नि वि व आर, टी, ओ, से पास करवाना
*ईस सडक मार्ग से केदारकान्ठा तक पर्यटन विभाग से पर्यटन स्वीक्रीती दिलाना! *केदारगंगा नदी का सौन्दरीकरण! *केदारगंगा नदी बौंदाऊ गाड बैनोल खड को मत्स्य पालन मत्सय क्रिडा हेतू संसतूती दिलाना! *होम स्टेयोजना के तहत पर्यटन विभाग से सभी ग्रामीणो को लाभान्वित करवाना!* *शिक्षा विभाग से ग्रामीणो के घटते विश्वास के लिए विभाग के साथ यथोचित संवाद स्थापित करना!
बी,एस,रावत,
गडूगाड के लोगों द्वारा एक समिति का गठन कर क्षेत्र में केदारकांन्ठा पर्यटन के विकास को लेकर संपूर्ण क्षेत्र के लोगों ने खरसाडी मे बैठक कर समिति का गठन किया, खरसाडी जिवाणु मोटरमार्ग से पर्यटन हेतू होम स्टे कर पलायन रुकवाना नगदी फसलों की ओर जाना हॉर्टिकल्चर मिशन की और जाना जमीनी हकीकत कार्यों की ओर अनदेखी करने वाले विभागों को सही दिशा दशा की और लेजाना समिति गठन का मुख्य उद्देश्य है! समिति की परि कल्पना समिति के अध्यक्ष जयरामसिह मानते है, कि जब तक हम स्वयं नही जाग जाते तब तक कुछ नहीं होने वाला है! वास्तव मे मोरी विकास खण्ड का गडूगाड क्षेत्र विकास कि द्रिष्टिसे पिछड़ा जा रहा है! ईसके लिए यह समिति गठन ज़रूरी है,
क्या होगें मुख्य बिंदु
केदारगंगा नदी का केदारकान्ठा से रिस्ता व केदारकान्ठा काअसली माहत्मय को दरशाना, *केदारकान्ठा से उदगम करने वाली यह नदी ईस क्षेत्र की जिवनदायीनि रही है! यदि ईस के ईतिहास को देखाजाय तो अधिक लम्बा नही है, क्यौकि कुछ वर्षो पहले यंहा का चावल पर्वत के अलावा हिमाचलके क्वार् लेजाया जाता था! आज भी यंहा के लोगो ने यह खेती बरकरार रखी है ! बहर हाल अब यह चावल कि डिमांड घर पर ही मिलजाती हैं! अपने तीस कि, मी मार्ग को प्रशस्त करने के बाद यह नदी टौन्स नदी मे मोरी बाजार के निकट मिल जाती हैं! लेकिन अपने दोनों किनारे की जनता की झोली को भर देने वाली यह केदारगंगा ने न कभी सूखे न भूखे अपने लोगो को सुलाया! अपितु अन्न के पूरे भण्डार ईस नदी ने आज तक भी कायम रखे हैं, जो कि प्रमाणिक सत्य देखा जा सकता है! कुल मिलाकर यंहा के बुद्धि जिवी लोगो का कहना है, केदारगंगा नदी हमारे लिए केदारकान्ठा के केदारेश्वर भगवान का बरदान है! यह छोटा परिचय यंहा के बुद्धि जिवीयौ केद्वारा है! ईस लिए पहला कार्य ।
*केदारगंगा नदी का सौन्दरीकरण, मत्स्य जल क्रिडा की और सरकार का ध्यान दिलाना,
नदी को संरक्षित रखने के उपाय, जल बढ़ोतरी करने वाले वनस्पति लगवाना, *बढतेपलायन को रोकने के लिए नगदी जैविक फल सब्जी को बढावा देना! *पर्यटन को बढावा देने वाली सरकारी मनसूबे को रोजगारपरक बनाने वाली कार्य योजना को सरकार के सामने लाकर अम्लीजामा पहनाना, यंहा के लोग खरसाडी से देवजानी केदारकान्ठा पर्यटक जोन चाहने की एक वजह देखे यह एक रोचक विषय है, सरकार का एक मत्स्य विभाग भी है, जिसे मत्सय क्रिडा पर्यटक अपना शौक मानते हैं! यह जोन जंहा खेती किसानों की भाग्य रेखा केदारगंगा बौदाऊगाड बैनोलखड है वंही यह मत्सय पालन के लिए मोरी से देवजानी तक ग्रामीणो की दोहरी आर्थिकी का स्रोत बनजायेगी, बहर हाल मत्सय निदेशालय ने यह पहलू अपनी नजर मे पहाड के छोटे पानी भरे गाड गदेरो को ईस से दूर रख बडी नदीयौ मे टौन्स पावर यमुना सहित उतराखण्ड की कई बडी नदी शामिल की गयी हैं! जिन पर पिछले वर्ष बैनोल से मोरी तक, सनैल से काष्ठा, यमुना नदी के टेन्डर समुहो को दिलाने की कबायत जो कि समुहो द्वारा ईस मे भाग न लेकर मत्सय विभाग की जल क्रिडा मत्स्य संरक्षण की नाकामयाबी रही! इस सन्दर्भ मे बी, एस, रावत, द्वारा निदेशक मत्स्य उतराखन्ड को छोटे गाड गदेरो को भी ईस परियोजना मे शामिल करने का सुझाव दिया गया था! छोटी गाड गदेरो मे यंहा मौताड बौदांऊगाड बैनोल खड, जिन पर मत्सय क्रिडा की अपार संभावनाए है! *
यह होगी प्रारम्भिक मांगे! *खरसाडी जिवाणु मोटरमार्ग को लो नि वि व आर, टी, ओ, से पास करवाना
*ईस सडक मार्ग से केदारकान्ठा तक पर्यटन विभाग से पर्यटन स्वीक्रीती दिलाना! *केदारगंगा नदी का सौन्दरीकरण! *केदारगंगा नदी बौंदाऊ गाड बैनोल खड को मत्स्य पालन मत्सय क्रिडा हेतू संसतूती दिलाना! *होम स्टेयोजना के तहत पर्यटन विभाग से सभी ग्रामीणो को लाभान्वित करवाना!* *शिक्षा विभाग से ग्रामीणो के घटते विश्वास के लिए विभाग के साथ यथोचित संवाद स्थापित करना!

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