होटल की नोकरी से समय निकालकर करते हैं समाजसेवा, आइये जानते कौन है समाजसेवी सोबत राणा उन्ही की जुबानी

समाज की सेवा करना मेरा बचपन का  शौक रहा समाज की सेवा करना मेरा धर्म ही नहीं बल्कि मेरा कर्तव्य भी है जन सेवा से शुरू हुआ यह सफर आज भी जारी है  सन् 2006 मे धारी कलोगी इंटरकॉलेज बोर्ड पास आवट किया उसके बाद में मसूरी में नौकरी करने आ गया मुझे महीने की तनख्वाह 500 रूपये मिलती थी और इन ही पैसे से प्राइवेट डिग्री की पढाई लिखाई की 2006 से मै होटल लाइन में ही काम करते आ रहा हूँ और साथ साथ में जनहित के  कार्य भी करते आ रहा हूँ  स्कूल के दिनो की बात कुच्छ अलग से ही होती है लेकिन नौकरी करने को जब व्यक्ति वेव्स होता है तो घर बार यार दोस्त सब भूलने पड़ते हैं लेकिन मेरा अंदाज कुच्छ अलग रहा है मै नौकरी तो भले करता हूँ लेकिन में कभी किसी के दवाव में काम नही करता हूँ मैंने कई होटलों मै कार्य किया लेकिन शान से किया  होटल के दोस्तों के साथ खुब मस्ती , हसी मजाक से रहता हूँ दोस्तों की बहुत मदद की जैसे कि किसी होटल मै मेरा दोस्त काम कर रहा हो और उस होटल का मालिक उसकी तनखा ना देता हो तो मै उसकी तनखा दिलवा देता था दिमाग से में हमेशा तेज रहा हूँ और दबंग रहने की आदत है कॉलेज के चुनावों मे जोश , रणनीति ,घर घर मे वोट मागने जाना , और मसूरी में आर्यन ग्रुप के सभी मित्रों के साथ चुनाव के दौरान आपसी तालमेल बनाने का संदेश दिया करता था सास्कृतिक का बड़ा शौक रहा जब गांव में रामलीला हुवा करती थी तब बहुत गाना गाया करता था ओ गाना मुझे आज भी याद है लंभी धोपेली पतली कमर बसिगे दिल मां बेठीजा भली बांध मेरी मोटरसाइकिल मां कई अन्य प्रोग्राम मे भाग लेना ओर दोस्तों के साथ ढेरसारी बाते करनी बहुत अच्छा लगता था धीरे धीरे से छोटे से छोटे  बड़े से बड़े नेताओं से जान पैछान होने लगी एक दिन पूर्व शहरी विकास मंत्री व वर्तमान धनोल्टी विधायक श्री प्रीतम सिंह पंवार जी के माध्यम से प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत जी से एक दिन गडिकेंट देहरादून में मुलाकात हुई माहुल को देखने के बाद शुरूवात  कि गरीबों को मुख्यमंत्री राहत कोष से और अपने क्षेत्र के कई लोगों को मुख्यमंत्री राहत कोष दिलाते रहा उसके बाद लोगों के दिल में जग बनाने की कोशिश करते आता आ रहा हूँ उसके बाद मेरा फोकस शिक्षा में गया मेने फिर अपने क्षेत्र के स्कूलों के अध्यापकों से मुलाकात करने लगा और बच्चों की समस्याओं को जानने की कोशी करते रहा स्कूल के अधयापकों  व छात्रों से मिली जानकारी स्कूल में खाना तो सरकार देती है लेकिन खाना खाने वाली थालिया घर से लानी पड़ती है फिर यही बात को दिमाग में चलती रही मैने कई जन प्रतिनिधयों से बात की लेकिन किसी ने मेरी बात नही को नही मानी सोचते सोचते परेशान हो गया एक आडिया आया दिमाग में अपनी महीने की तनखा से कुच्छ कुच्छ रुपऐ जमा करते रहा वक्त दिया भगवान ने 15 अगस्त 2016 को राजकीय उच्च माध्यम विद्यालय गढ़ खाटल में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में जाने का अवसर मिला उस अवसर पर मैने सात स्कूलों के छात्रों को 280 थालियां भेंट की और शिक्षकों  का आभार व्यक्त किया जिन्होंने मुझे सेवा करने का अवसर दिया दिलचस्पी हुई अपने आप पर और मेरा जीवन आगे की ओर बढ़ने लगा और मजबूती के साथ क्षेत्र की सेवा करने की हर वक्त सोचते आया हूँ और 2016 के लास्ट में मेरे गांव के उच्च माध्यमिक विद्यालय के  अध्यापक का किसी कारण निधन हो गया और स्कूल बन्द होने के तगार में आ गया  विद्यालय में तरीबन 30 से 35 छात्र छात्रा अध्यन करते थे मुझ से रहा नही गया अध्यापक के लिए बहुत संघर्ष किया लेकिन कुच्छ नही हुआ साथ साथ मे होटल की नौकरी भी करता रहा लास्ट में एक सोच आई मेरे गांव के लोगों ने कहा जो भी करना है करो हम आपके साथ है 2018 में एक लिखित पत्र S D M बड़कोट के नाम से बनाया और पर्मिशन ली 2 दिन तक भूकर्ताल में बैठ गया इतनी परिश्रम करने के बाद अध्यापक की व्वयस्था कर पाया आज स्कूल सुचारू रूप से चल रहा है 2019 में एक वाट्सएप ग्रुप से सूचना मिली कि जोली ग्रांड हॉस्पिटल में एक लड़का असहन अली जिसकी उम्र 16 साल की है वह मुस्लिम समुदाय का है मेने जात धर्म को न देखते हुए एक इंसान के नाते  वह गरीव परिवार से था वह मौत की सांसें गिन रहा था उसको तत्काल ब्लड की जरूरत थी मेरे से रहा नही गया और मैने अपना जीवन परवाह न करते हुए अपने शरीर से 1 यूनिट ब्लड दान कर दिया नजर आई रोड की समस्या लिंक मार्ग तो बन रखा था लेकिन पहाड़ो से चटान टूटने के कारण मार्ग कई समय तक बंद रहा गांव के लोग बहुत परेशान रहे  रोड़ को सही तरीके से चालू करने के लिए बहुत प्रयास किया न्यूज़ चेनलों के माध्यम से बहुत ताकत मिली आज भी मेरे पास सारा रिकार्ड है जरूरत पड़ने पर दिखा भी सकता हूँ  आज मेरे गांव की रोड़ में बड़ी सलामत से गाड़ीयां चल रही है  एक समस्या का समाधान कर पाया तब तक एक चुनौती और पैदा हो गई गांव के लोगों से मालूम पड़ा सरकार के द्वारा रोड तो काट ली गई  लेकिन कास्तकारों का  मुवावजा अभी तक नहीं मिल पाया 2018 से संगर्ष करते आया और 2020 टोंटी टोंटी का मैच सामने आया 1 फरवरी 2020 को कास्तकारों को 140, 4250 चौदह लाख चार हजार दो सौ पचास रुपए शासन से सुविकृत कराकर गांव के कास्तकारों को उनका हक दिलाने में कामयाब हुवा समय के साथ साथ आगे चलकर मेरा जीवन जनहित के लिए सदैव समर्पित रहेगा विच में कई मोडों पर कई चढ़ाव कई उतरवा कई बाधाए आये लेकिन मै संगर्ष करता रहा मेरे कार्य सफल होते रहे मै कोई प्रतिनिधि नही हूँ मैं एक आम नागरिक हूँ आम नागरिक के तरह काम मरता रहूंगा जो मेरा हुनर है मेरी ताकत  है मेरे पता पिता जिन्होंने मुझे इस धरती पर जन्म दिया दुनिया दिखाई पाला पोसा पढ़ाया लिखाया मेरे साथ हर वक्त मेरे माता पिता का आशीर्वाद रहे जनता की सेवा करने के लिए मेरा जीवन रहे

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