1 फरवरी को उत्तराखंड नवनिर्माण सेना द्वारा राज्य में निरंतर बिजली तथा पानी की दरों में होती वृद्धि के परिपेक्ष जिलाधिकारी देहरादून के माध्यम से राज्य मुख्यमंत्री को मांगपत्र प्रेषित किया गया।
संगठन वक्ताओं ने कहा कि राज्य में निरंतर विद्युत तथा जल दरों में होती निरंतर वृद्धि के चलते जलसंसाधनों से सम्पन्न तथाकथित ऊर्जा प्रदेश की सवा करोड़ से अधिक समस्त जनता आक्रोशित तथा कुंठित है।
राज्य निर्माण के समय से ही ये अवधारण रही कि राज्य में उपलब्ध प्रचुर जल संसाधनों का उपयोग कर राज्य , आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर तथा विकसित राज्यों में सम्मलित होगा। किन्तु इसे राज्य का दुर्भाग्य कहें कि राज्य निर्माण के 19 वर्षों के उपरांत भी ये अवधारणा जमीन पर ना उतर सकी, जिसका खामियाजा दरों में वृद्धि के चलते राज्य की समस्त जनता भुगत रही है।
राज्य निर्माण के उपरांत से निरंतर प्रतिवर्ष निगमों में घाटों को दर्शा उनका भार जनता के कंधों पर डाला गया। वृद्धि रूपी शोषण की ये परंपरा निरंतर 19 वर्षों के उपरांत आज भी चालू है।
किसी भी परिवार हेतु बिजली तथा पानी मूलभूत जरूरत है। किंतु वर्तमान में आम आदमी की आय का अधिकतर हिस्सा मंहगाई तथा बिजली एवं पानी के बिलों को चुकाने में जा रहा है।
इसे नीतियों का फर्क कहें या अव्यवस्थाओं का चरम की उत्तराखंड में पैदा हुई बिजली तथा पानी को एक तरफ दिल्ली सरकार मुफ्त मुहैया करा रही है, जबकि राज्य में बिजली तथा पानी महंगी दरों पर उत्तराखंड की जनता को वितरित किया जा रहा है।
इनके प्रमुख कारणों में एक घाटे में चल रहे निगम तथा उनमें व्याप्त भ्रस्टाचार भी है। गत 19 वर्षों के अंतराल में ऊर्जा निगम में घोटालों की लंबी फेरिस्ट है। किन्तु इसे दुर्भाग्य कहें की ऊर्जा निगम के अंतर्गत आने वाले UPCUL , UUJVNL,PTCUL इत्यादि में हुए घोटाले कभी जांच तक पहुँचे नहीं, या फिर मुट्ठीभर हुई जांचों की फाइलें कार्यालयों में आज भी किसी कोने में पड़ी धूल खा रही हैं। इस पत्र के माध्यम से राज्य सरकार से मांग कि गई की :--
1) मंहगाई के इस दौर में जनता के बोझ को कम करने हेतु राज्य में बिजली की दरों को आधा किया जाय।
2) राज्य में जनता को दिल्ली राज्य की तर्ज पर निःशुल्क 300 यूनिट बिजली तथा पानी उपलब्ध कराया जाय।
3) राज्य में स्थापित दूसरे राज्यों तथा केंद्र द्वारा स्थापित योजनाओं में राज्य की रॉयल्टी की भागीदारी 12% से बढ़ाकर 50% करने हेतु व्यस्थित तथा नीतिगत सार्थक कदम उठाए जाएं ।
4) ऊर्जा निगम में भ्रस्टाचार में लिप्त दोषी अधिकारियों पर त्वरित निर्णायक कानूनी कार्यवाही तथा लंबित जांचों पर तेज़ी से कार्यवाही करते हुऐ, समस्त शीर्ष पदाधिकारियों की संपत्ति जांच हेतु आदेश निर्गत किये जायें।
वक्ताओं ने कहा कि उम्मीद की राज्य सरकार समस्त जनता , लघु व्यापारी समेत समस्त कामगारों के हितों को सुरक्षित करने हेतु उपरोक्त मांगों पर गंभीरता से कदम उठाते हुए राज्य हित में आप सार्थक कदम उठाएगी। ये आरंभ है अगर राज्य सरकार इसके परिपेक्ष उचित निर्णय नहीं लेती तो नवनिर्माण सेना इन मुहिम तथा मांगों को जन जन तक तक लेकर जायेगी। इस मौके पर दीपक गैरोला, बिजेंद्र बिष्ट , बिजेंद्र रावत, पंडित विपुल नोटियाल, सुशील कुमार , सतीश सकलानी, हरीश थपलियाल, रमा चौहान,भार्गव चंदोला, चतुर प्रसाद, सोनल चौहान,वीरपाल इत्यादि उपस्थित रहे।



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