उत्तराखंड नवनिर्माण सेना दून स्कूल में हिन्दी व संस्कृत को प्रवेश परीक्षा में शामिल करने के लिए कल दून स्कूल प्रसासन से करेगा मुलाकात

देहरादून स्थित देश के सर्वश्रेष्ठ स्कूलों में एक दून स्कूल द्वारा राष्ट्र भाषा हिंदी तथा देव भाषा संस्कृत को वैकल्पिक  बनाने के परिपेक्ष में  उत्तराखंड नवनिर्माण सेना महासचिव सुसील कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जताया रोस ।
 देहरादून स्थित  सर्वोत्तम स्कूलों में एक देहरादून स्थित दून स्कूल में स्कूल प्रवेश परीक्षा से हिंदी को हटाये जाने तथा देवभाषा संस्कृत को वैकल्पिक बनाये जाने के परिप्रेक्ष उत्तराखंड नवनिर्माण सेना पदाधिकारिओं द्वारा दून स्कूल प्रसाशन से संवाद कर को मांगों को लेकर ज्ञापन प्रेषित किया गया था I किन्तु लगभग एक माह समाप्त होने के उपरांत भी स्कूल प्रशासन के द्वारा इस परिपेक्ष मैं किसी भी स्तर पर कोई संवाद नहीं किया गया I जिन मांगों को लेकर ज्ञापन प्रेषित किया गया था वो निम्न हैं ।

1) 3 वर्ष पूर्व दून स्कूल के प्रवेश परीक्षा से राष्ट्र भाषा हिंदी को हटाया गया। ये दुर्भग्यपूर्ण है कि जिस विद्यालय में देश के बड़ी राजनीतिक तथा अन्य क्षेत्रों से जुड़े हस्तियों के बच्चे शिक्षा ले रहे है, उनमें किसी के द्वारा भी इस पर कोई प्रश्न या संवाद विद्यालय से नहीं किया गया।

2) देवभाषा संस्कृत भाषा ही नहीं अपितु भारत की संस्कृति तथा काव्यों की आत्मा है। इन हालात में आजादी से पूर्व चली रही व्यवस्थाओं में विद्यालय पाठ्यक्रम में देव भाषा को वैकल्पिक करने का निर्णय संस्कृति को पहचान तथा सशक्तिकरण पर कुठाराघात है।

3) 8 से 9 वर्ष पूर्व तक हिंदी पाठ्यक्रम में गढ़वाली तथा कुमाऊँनी साहित्य भी पाठ्यक्रम का हिस्सा रहे। उन्हें हटाया जाना स्कूल की  देवभूमि के प्रति सोच तथा दृष्टिकोण पर प्रश्न है।

4) केंद्र तथा राज्य सरकार देश तथा देवभूमि को विश्व गुरु कब रूप में स्थापित करने पर संवाद करते है। प्रश्न यही क्या दून स्कूल प्रसाशन को देश में कोई योग्य व्यक्ति नजर नहीं आता जो साल दर साल स्कूल में हेडमास्टर के पद पर बाहरी देश के व्यक्ति की नियुक्ति की जाती है,जोकि देश या देवभूमि की संस्कृति तथा परंपराओं से पूर्णतः अनिभिज्ञ होता है।

*राष्ट्र भाषा हिंदी तथा देवनागरी संस्कृत को समाप्त कर अन्य भाषाओं का विकास किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं है। संगठन ने स्कूल प्रशासन से मांग की थी  कि हिंदी भाषा को प्रवेश परीक्षा को सम्मलित किया जाय तथा गढ़वाली एवम कुमाऊँनी साहित्य को समाहित कर विद्यार्थियों को पढ़ाया जाय। देव भाषा संस्कृत को वैकल्पिक के स्थान पर नियमित पाठक्रम में सम्मलित कर संस्कृति को सम्मान प्रदान करें।

इस परिपेक्ष पुनः उत्तराखंड नवनिर्माण सेना का प्रतिनिधिमंडल कल दिनांक 14 जनवरी को पुनः सुबह 12 बजे  दून स्कूल मैं जाकर स्कूल प्रशासन से संवाद हेतु मुलाकात करेगा तथा जानने का प्रयास करेगा की किन कारणों के चलते आजादी से पूर्व चली आ रही परम्पराओं को समाप्त किया जा रहा है I
                                                                                                                                  

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