माँ नही होती तो जिंदगी क्या होती हैं, शिवम सेमवाल

🌺माँ नही होती है,तो जिंदगी क्या होती है🌺
कल जब उठ कर काम पर जा रहा था , तो अचानक लगा की कोई रोक लेगा मुझे
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और कहेगा की खड़ा- खड़ा दुध मत पी हजम नही होगा तुझे
दो घड़ी सांस लेले, अरे इतनी ठंड है और कोट भी भूल गया इसे भी अपने पास लेले
मन में सोचा माँ रसोई से बोली होगी, जिसके हांथों में सना आटा होगा
पर पलट कर देखा तो क्या मालूम था, के वहाँ सिर्फ सनाटा होगा
अरे अब हवांए ही तो बात करती है मुझसे
लगता है जब जाऊँगा खास काम से तो कोई कहेगा, दही शकर खा ले बेटा सगुन होता है
पर मन इसी बात के लिए तो रोता है..... के सब कुछ है माँ सब कुछ
जिस आजादी के लिए मैं तुझसे सारी उम्र लडता रहा
वो सारी आजादी मेरे पास है, फिर भी न जाने ये दिल की धड़कन क्यों उदास है
रात को घर देर से लौटुं तो कौन नाराज होगा भला
कौन कहेगा बार -बार के अब कहाँ चला
पैंसे कंहाँ खर्च हो जाते हैं तेरे क्यों नहीं बताता है, सारा -सारा दिन मुझे सताता है
खाना खिलाने को तेरे पिछे भागते रहूँ, बहाती रहूँ आंसू तेरे लिए
कभी कुछ सोचा है मेरे लिए
कोई तो ये सब बोलने वाला होता
आज तमाम खुशीयां है, गम ये नहीं है कि कोई ये खुशीयां बांटने वाला होता
पर कोई तो होता जो गलतीयों में डांटने वाला होता
मेरे बिमार होने पर तू बहुत परेशान होती, मुझे साथ में न पा कर अकेले में बहुत रोती
सब कुछ है माँ सब कुछ, तरक्की की हर लकीरें आज तेरे बच्चों को छू कर जाती है
पर माँ आज तेरी याद बहुत आती है! 😞
            --  शिवम सेमवाल

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