उत्तरकाशी: यमुनाघाटी में कांग्रेस संगठन एक बार फिर अंदरूनी खींचतान में उलझता नजर आ रहा है। कार्यकर्ताओं ने जिला अध्यक्ष के रूप में पूर्व अध्यक्ष दिनेश चौहान की दोबारा नियुक्ति पर कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि हाल ही में आयोजित सृजन कार्यक्रम में लोकेंद्र रावत का नाम सर्वसम्मति से प्रस्तावित हुआ था, लेकिन दिल्ली से जारी सूची में फिर से दिनेश चौहान का नाम सामने आ गया।
“जब राय ली ही थी तो अनदेखी क्यों की गई?”
स्थानीय कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि जब संगठन ने कार्यकर्ताओं की राय ली थी तो फिर उसे नज़रअंदाज़ क्यों किया गया। कार्यकर्ताओं के अनुसार, दिनेश चौहान ने स्वयं उस बैठक में लोकेंद्र रावत के नाम का समर्थन किया था।
एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने कहा, “जब सृजन बैठक में सभी ने लोकेंद्र रावत का नाम भेजा था, तो यह बदलाव आखिर किस स्तर पर हुआ?”
पुरोला में बैठक, हाईकमान से जवाब की मांग
दिनेश चौहान की नियुक्ति के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुरोला में बैठक आयोजित कर पार्टी नेतृत्व से इस फैसले को बदलने की मांग की है। बैठक में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो वे दिल्ली जाकर शीर्ष नेतृत्व से मिलेंगे या खुला विरोध करेंगे।
कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पंचायत चुनावों में पार्टी ने एक भी उम्मीदवार घोषित नहीं किया था, बावजूद इसके उसी नेतृत्व को फिर से पुरस्कृत किया गया है।
“ऊपर से थोपने की संस्कृति अब बंद होनी चाहिए”
एक युवा कांग्रेसी नेता ने कहा, “तीनों ब्लॉक प्रमुखों और दो नगर पालिका सीटें गंवाने के बावजूद संगठन उसी पुराने नेतृत्व पर भरोसा कर रहा है — यह सोचने वाली बात है। अगर यही हालात रहे तो 2027 में कांग्रेस को यमुनाघाटी में भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।”
गुटबाज़ी गहराने का खतरा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद अगर जल्द नहीं सुलझा तो उत्तरकाशी में कांग्रेस संगठन में एक बार फिर गुटबाज़ी गहराएगी। पहले भी क्षेत्र में वरिष्ठ बनाम युवा गुट के टकराव से पार्टी को नुकसान झेलना पड़ा था।
विरोध करने वाले प्रमुख नाम
दिनेश चौहान की नियुक्ति का विरोध करने वालों में —
कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष प्रीतम राणा, पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख सुबास नेगी, पीसीसी सदस्य रेखा नोटियाल जोशी, पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष जगदीश गुसाईं, पूर्व प्रदेश सचिव दिनेश खत्री, नरेश चौहान,प्रधान प्रमोद रावत, सभासद अंकित चौहान, अजय पंवार, परवीन ठाकुर, सुधीर कांसवाल, विजयपाल सिंह चौहान, योगेंद्र रावत, ओमप्रकाश रावत, और रोहित रावत सहित दर्जनों कार्यकर्ता शामिल रहे।

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