जखोल गाँव में भालुओं के आतंक से घरों में भी सुरक्षित नहीं ग्रामीण । गंगा सिंह रावत ने वन मंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर वन क्षेत्राधिकारी को हटाने व लापरवाह अधिकारियों पर कार्यवाही की मांग की । ज्ञापन में भालू द्वारा बाग -बगीचों व फसलों को हुए नुकसान का उल्लेख। बैल -खच्चर व पालतू जानवरों को मारे जाने तथा घरों के दरवाजे तोड़ने का भी किया उल्लेख ।


मोरी/पुरोला/उत्तरकाशी, 29 नवंबर 2025।

गोविन्द वन्य जीव विहार क्षेत्र के जखोल गांव में पिछले दो महीनों से जंगली भालुओं के हमले लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे ग्रामीणों के घरों, बगीचों और फसलों को भारी नुकसान पहुँच रहा है। जखोल गांव के सामाजिक कार्यकर्ता व देवक्यारा बुग्याल पर्यटन विकास समिति के अध्यक्ष गंगा सिंह रावत ने इस स्थिति से परेशान होकर उत्तराखंड के वन मंत्री को ज्ञापन भेजकर कार्रवाई की मांग की है।



गंगा सिंह रावत ने बताया कि 4 अक्टूबर 2025 से अब तक लगभग 150 बगीचे व फसलों को भली नष्ट हो चुके हैं। कई घरों में भालू रात के समय घुसपैठ कर रहे हैं, जिससे लोगों में दहशत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि भालू द्वारा पालतू जानवरों  बैल व खच्चर को मारने की घटनाओं को होना अब आम हो गया है।


उन्होंने कहा कि कि कई बार सूचना देने के बावजूद वन विभाग मौके पर नहीं पहुँचा, जिससे समस्या और बढ़ रही है। ज्ञापन में क्षेत्र के वन अधिकारी को बदलने और नए अधिकारी की तैनाती की मांग भी की गई है, ताकि क्षेत्र में सुरक्षा और राहत कार्य तेज़ी से हो सके।


उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भालुओं के हमले नहीं रुके और सुरक्षा व्यवस्था नहीं बनाई गई, तो ग्रामीण वआंदोलn करने को मजबूर होंगे।

वन विभाग पर लापरवाही के आरोप, त्वरित समाधान की माँग


 ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया है कि उन्होंने बार-बार फोन और संदेश के माध्यम से वन क्षेत्राधिकारी को सूचना दी, लेकिन उचित प्रतिक्रिया न मिल पाने से स्थिति और भयावह होती जा रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन अधिकारी कई बार सूचित करने पर भी मौके पर नहीं पहुँचे, जबकि मामले की गंभीरता को स्थानीय मीडिया में भी प्रकाशित किया गया था।


वन मंत्री से अधिकारी परिवर्तन व नई तैनाती की माँग



ग्रामीणों ने वन मंत्री से निवेदन किया है कि —


✔ जखोल क्षेत्र से वर्तमान वन क्षेत्राधिकारी को हटाया जाए

✔ क्षेत्र में नए अधिकारी की तैनाती की जाए

✔ भालुओं के प्रवेश को रोकने, ट्रैपिंग या रेस्क्यू के लिए त्वरित अभियान चलाया जाए

✔ ग्रामीणों की जान–माल की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था की जाए




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