मन की शांति ओर स्थिरता के लिए नियमित अनुलोम विलोम प्रणायाम का अभ्यास अत्यन्त लाभकारी। फेफड़ों के स्वास्थ्य के लिए अनुलोम विलोम अत्यंत लाभकारी। Regular practice of Anulom vilom Pranayam is very beneficial for peace and stability of mind. Anulom Vilom is very beneficial for the health of the lungs.

 अनुलोम विलोम प्राणायाम एक प्रकार का श्वास-प्रश्वास आधारित योगिक अभ्यास है जो मानसिक शांति, एकाग्रता और शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद करता है। इसे "नाड़ी शोधन प्राणायाम" भी कहा जाता है क्योंकि यह शरीर की ऊर्जा नाड़ियों को शुद्ध करता है।

अनुलोम विलोम प्राणायाम में अनुलोम का अर्थ सीधी दिशा (प्राकृतिक क्रम)  एवं विलोम का अर्थ उलटी दिशा (विपरीत क्रम)   है।

प्राणायाम से तात्पर्य श्वास के माध्यम से प्राण (ऊर्जा) का नियंत्रण  है।

अनुलोम विलोम करने के लिए  सुखासन, पद्मासन या किसी भी आरामदायक मुद्रा में बैठ जाए एवं रीढ़ सीधी रखें।   दाए हाथ को नासिका के पास ले जाए। अंगूठे से दाईं नाक बंद करें और अनामिका (रिंग फिंगर) से बाईं नाक बंद करें।  

 बाईं नाक बंद करें, दाईं नाक से सांस लें।  दोनों नाक बंद करके सांस रोके,  बाईं नाक खोलकर सांस छोड़ें। अब बाईं नाक से सांस लें ।  दोनों नाक बंद करके सांस रोकें।  दाईं नाक खोलकर सांस छोड़ें । यह एक चक्र पूरा हुआ। इस प्रक्रिया को 5-10 मिनट तक दोहराएं।  


अनुलोम विलोम  मन को शांत करता है, तनाव और चिंता कम करता है।  फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है और श्वसन तंत्र को मजबूत करता है।  हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक, रक्तचाप संतुलित करता है।  पाचन तंत्र को सुधारता है और शरीर की ऊर्जा को संतुलित करता है।  नींद की गुणवत्ता में सुधार करता है।  

 सर्दी-जुकाम हो तो अनुलोम विलोम का अभ्यास न करें।  हाई बीपी वाले लोग कुंभक (सांस रोकने) की अवधि कम रखें।  गर्भवती महिलाएं धीरे-धीरे अभ्यास करें।  


अनुलोम विलोम प्राणायाम नियमित करने से शरीर और मन में स्थिरता आती है। शुरुआत में किसी योग गुरु के मार्गदर्शन में अभ्यास करना उचित होता है। 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ