गजेंद्र सिंह चौहान पुरोला
उत्तरकाशी जनपद में इससे पूर्व हुए निकाय चुनावों में भाजपा के लिए इतना मुश्किल समय शायद पहले कभी न रहा हो । चुनाव में जीत मिली या हार पर ऐसा पहली बार हो रहा है कि अपने ही बेगाने हो गए हो । जनपद के रंवाई घाटी में तो असंतोष इस कदर दिखाई दे रहा है कि कद्दावर नेताओं को भी भीड़ दिखाने के लिए कांग्रेसियों का सहारा लेना पड़ रहा है। बात बड़कोट की करे तो यहां कपिलदेव रावत ने टिकट न मिलने से नाराज होकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया। नामांकन से पूर्व कपिलदेव के रोडशो में उमड़ी ऐतिहासिक भीड़ को देखकर भाजपा के नीति निर्धारकों के पैरों तले मानो जमीन ही खिसक गई । खैर भारतीय संविधान में प्रदत अधिकारों के तहत गुंडा -मवाली ही नहीं अपितु जेल में बंद आंतकवादी तक लोकसभा का चुनाव लड़ सकते है पर कपिलदेव जैसे लोगों का नामांकन अतिक्रमण के नाम पर रद्द कर दिया जाता हैं। अब सवाल ये है कि कपिलदेव का नामांकन रद्द होने का खामियाजा कौन भुगतेगा ? जाहिर बात है भाजपा को नुकसान होगा ।
अब बात नौगांव की करे तो यहां भाजपा से बागी हुए यशवंत चुनाव मैदान में है व इनकी वजह से भाजपा का ग्राफ बिगड़ रहा है। पुरोला में अमीचंद बागी बन निर्दलीय चुनाव लड़ रहे है, आज पूरे दिन इनको मनाने की पुरजोर कोशिश की गई पर ये नहीं माने ।
खैर उपरोक्त तीनों भाजपा के कर्मठ सिपाही रहे है व अब भाजपा के नेताओं के खिलाफ मुखर हो गए है। देखना ये है की भाजपा उम्मीदवार बागियों की उपस्थिति में समर्थन जुटा पाते हैं या नहीं ।
कबर स्टोरी में आगे पढ़िए मनरेगा श्रमिक भारतीय संविधान की खुल्लम खुल्ला धज्जियां उड़ाकर कैसे नगर पालिका पुरोला का लड़ रहे चुनाव ।

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