बाबासाहेब डॉ भीमराव अंबेडकर कृत संविधान का पुरोला में चुनाव आयोग खुलकर कर रहा है अपमान । मनरेगा श्रमिको को आयोग दे रहा है नगर पालिका चुनाव लड़ने की इजाजत, आधे के करीब मतदाता भी है मनरेगा श्रमिक। The Election Commission is openly insulting the Constitution written by Babasaheb Dr. Bhimrao Ambedkar in Purola. The Commission is giving permission to MNREGA workers to contest municipal elections, almost half of the voters are MNREGA workers.

 गजेन्द्र सिंह चौहान, पुरोला 

बाबासाहेब डॉ भीमराव अंबेडकर कृत भारत के संविधान में प्रदत अधिकारों के तहत भारत की संसद द्वारा बनाए गए कानून के अनुसार सरकार ग्रामीणों को 100 दिन रोजगार की गारंटी देती है। मनरेगा के अनेक प्रावधानों में से एक प्रावधान ये भी है कि उक्त व्यक्ति को किसी भी गांव का निवासी होना चाहिए न कि किसी शहर का निवासी होना चाहिए।


स्पष्ट है कि जो व्यक्ति या परिवार गांव में रहकर अपनी आजीविका चला रहा है वहीं व्यक्ति मनरेगा के अंतर्गत लाभ लेने का पात्र है । अब जो व्यक्ति किसी गांव में मनरेगा के तहत लाभ का पात्र है वो व्यक्ति किसी शहर का निवासी हो ही नहीं सकता है। अब जो व्यक्ति किसी शहर का निवासी ही नहीं है वो व्यक्ति उस शहर का मतदाता बन कैसे गया।

इतनी बड़ी तादात में मनरेगा श्रमिकों को पुरोला निकाय में पहले मतदाता बनाना व उसके बाद उन्हें चुनाव लड़ने की इजाजत देना देश के संविधान का बहुत बड़ा अपमान ही नहीं अपितु लोकतन्त्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

असल सवाल अब भी यही है कि एक व्यक्ति जो मनरेगा श्रमिक हैं ,अभी तो नगर पालिका पुरोला के चुनाव प्रभावित कर रहा है व 6 महीने बाद अपनी मूल ग्राम पंचायत के चुनाव को प्रवाहित करेगा । खैर जब पूरे देश में भ्रष्टाचार चरम पर हो तो चुनाव कराने की की जरूरत ही क्यों है। सीधे तौर पर नामित व्यक्तियों को ही पदभार दिया जाना चाहिए।


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