#नमोनारायण
यहां ये भी स्पष्ट कर देना चाहता हु कि जब कुछ विकास योजनाओं को सरकार ने विलोपित कर दिया था तब नगर पंचायत द्वारा उन ठेकेदारों को नोटिस देकर काम करने को मजबूर किया गया जो कि अनैतिक था । जिस कारण उक्त कार्यों को करने वाले ठेकेदार कर्ज जाल में फंस गए । मेरा समर्थन व सहयोग उन ठेकेदारों को सदेव रहेगा ओर उनको न्याय मिलने तक में उनके साथ रहूंगा।
अब हरिमोहन नेगी से अपना तुलनात्मक विवेचना करना भी आवश्यक हो गया है। क्योंकि #bjp खेमे में हलचल है कि अंतगोत्व उनकी लोकप्रियता को मद्देनजर रखते हुए उन्हें भाजपा अपने पाले में लाकर नगर पालिका अध्यक्ष पुरोला का चुनाव टिकट भेंट करेगी । उन्हें कार्यकाल पूर्ण होने से पहले सरकार ने वित्तिय अनियमिताओं के आरोप में नगर पंचायत पुरोला के अध्यक्ष पद से बर्खास्त कर दिया था । अब सुनने में आ रहा है कि सरकार उनपर लगे आरोपों को वापस लेने जा रही हैं या यो कहे कि वापस ले चुकी है। यद्यपि इस बात की कोई पुष्ट खबर नहीं है।
हरिमोहन नेगी को यहां विकास पुरुष की संज्ञा दी जाती है व हो भी क्यों नहीं, क्योंकि उनके कार्यकाल में नगर के तमाम रास्तों में टाइल बिछी है। अब आप कहेंगे कि पूर्व के नगर पंचायत अध्यक्ष पीएल हिमानी व उनसे पूर्व पुरोला गांव के प्रधान, कुमोला गांव के प्रधान व ख़ाबली सेरा के प्रधानों ने कुछ काम ही नहीं किया होगा, तभी तो हरिमोहन नेगी को विकास पुरुष कहा जा रहा है। ऐसा नहीं कि उन्होंने विकास नहीं किया, तो फिर हरिमोहन नेगी को विकास पुरुष क्यों कहा जा रहा है?
बात दअरसल ये है कि पूर्व के प्रधानों ने उस समय के बजट का सदुपयोग करते हुए पूरे नगर के रास्तों में पीसीसी बिछा दिया , जिसे यहां की स्थानीय भाषा में गट्टा बिछा दिया कहते है। गट्टा बिछाने पर तत्कालीन प्रधानों को भी विकास पुरुष की संज्ञा दी जाती रही है। अब नेगी नगर पंचायत अध्यक्ष बने तो उन्होंने उन रास्तों के ऊपर टाइल बिछा दी जिनपर पहले से ही गट्टा बिछा हुआ था । यद्यपि उक्त कार्यों को आप भ्रष्टाचार के दृष्टिकोण से देखेंगे व उनका प्राक्कलन व एमबी पर नजर दौड़ाएंगे तो शायद आपको ये भी पता चल जाएगा उसमें पीसीसी कार्य भी सम्मिलित होगा।
अब बात करे पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष पीएल हिमानी की तो उन्होंने अपने कार्यकाल में नगर के उन तमाम रास्तों में पीसीसी कार्य कराया जिनपर पूर्व के प्रधानों ने कार्य नहीं कराया था। पीएल हिमानी के कार्यकाल में कुमोला रोडपर पीसीसी बिछाया गया व हरिमोहन नेगी ने उस पीसीसी पर टाइल बिछाई ।
अब आप लोगों की समझ में गया होगा कि हरिमोहन नेगी को विकास पुरुष क्यों कहा जाता हैं। अब सवाल ये भी है कि पूर्व के प्रधानों व पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष पीएल हिमानी ने रास्तों में टाइल क्यों नहीं बिछाई तो इसका सीधा सा जवाब है कि उनके कार्यकाल के समय टाइल बिछाने का प्रचलन नहीं था ।
अब हरिमोहन नेगी के कार्यकाल बिछाई गई टाइलों का प्राक्कलन व एमबी का अध्ययन एक बार जरूर कर लेना, क्योंकि एक तो उसमें मेरे दृष्टिकोण से पीसीसी कार्य भी संभत सम्मिलित हो ओर टाइल की मोटाई के बारे में भी अध्ययन जरूर कर लेना । क्योंकि मुझे ये लगता है कि टाइल की मोटाई कागज में कुछ ओर है व जमीन पर कुछ ओर है।
उपरोक्त कथनों में हमने ग्राम प्रधानों का जिक्र किया है तो पुरोला विकासखंड के अंतर्गत के ग्राम प्रधानों का जिक्र कर लेते है कि क्या ये भी विकास पुरुष बनकर उभरे है।
तो सबसे पहले मठ के प्रधान अरविंद पंवार व कंडियाल गांव के प्रधान बिजेंद्र पंवार का जिक्र कर लेता हु क्योंकि इन्हें भी विकास पुरुष कहा जाता हैं। इन्हें विकास पुरुष इसलिए कहते है कि इन्होंने भी गांव के रास्तों में टाइल बिछाई है। यही नहीं इन्होंने तो तमाम ग्राम वासियों की छानिया यानी गौशालाओं का भी निर्माण किया। करड़ा गांव के प्रधान अंकित रावत ने अकेले ही शिकारू नाग व लुदेश्वर महाराज का मंदिर बना दिया, इन्हें भी विकास पुरुष कहा जाता हैं। ऐसे तमाम प्रधान हैं जिन्हें उनके कार्य के लिए राष्ट्रपति तक सम्मानित कर चुके है , ये सभी विकास पुरुष है।
अब हरिमोहन नेगी से खुद की तुलना करनी जरूरी है। हरिमोहन नेगी ने पुरोला को एक स्टेट ऑफ आर्ट कूड़ा निस्तारण केंद्र दिया है जो अगर टूटा या यो कहे कि फटा तो पुरोला नगर के ऊपर बहुत बड़ी आफत आ सकती हैं क्योंकि ये फटा तो इसका मलबा कमल नदी के प्रवाह को अवरुद्ध करेगा । जिस कारण भयंकर आपदा आ सकती हैं।
अगर मुझे नगर पालिका अध्यक्ष बनने का सौभाग्य मिला तो में उक्त कूड़ा निस्तारण केंद्र की डिस्मेंटल करके कूड़ा निस्तारण केंद्र को अन्यत्र भूमिगत स्थापित करूंगा । ताकि नगर वासियों को गंदगी से छुटकारा मिलेगा व साथ ही आवारा कुत्तों व बंदरों का भी भी खत्म हो जायेगा।
यहां ये भी स्पष्ट कर देना चाहता हु कि जब कुछ विकास योजनाओं को सरकार ने विलोपित कर दिया था तब नगर पंचायत द्वारा उन ठेकेदारों को नोटिस देकर काम करने को मजबूर किया गया जो कि अनैतिक था । जिस कारण उक्त कार्यों को करने वाले ठेकेदार कर्ज जाल में फंस गए । मेरा समर्थन व सहयोग उन ठेकेदारों को सदेव रहेगा ओर उनको न्याय मिलने तक में उनके साथ रहूंगा।
लेखक का परिचय
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