21 मार्च 2021 की ये दिल दहलाने वाली तस्वीर है। ये विगत 30 वर्षों से सड़क की लड़ाई लड़ रहे Purola तहसील के ग्राम शिकारु की है। जब एक बीमार महिला को पीठ पर चार किलोमीटर पैदल ग्राम करड़ा तक लाया जाता है। उ
सके बाद एक घंटा एंबुलेंस का इंतजार किया जाता है व फिर पांच घंटे की मशक्कत के बाद अस्पताल पहुंचते है। मैं सड़क की लड़ाई सड़क पर लड़ रहे इस गांव के एक युवा महिपाल सिंह रावत के हौंसले को सलाम करता हूं जिसने विगत 10 वर्षों में सड़क को ही अपना मिशन बना लिया है। उम्मीद करता हु की महिपाल की मेहनत रंग लाएगी व शिकारूं तक रोड अवश्य पहुंचेगी ।
यही नहीं सरकार व शासन में बैठे लोगो से रोड से वंचित बडियार, सांखल, पुसेली व सुरानू की सेरी आदि गांवों तक रोड पहुंचाने की भी अपील करता हु ।
उम्मीद ये भी करता हु कि पुरोला तहसील मुख्यालय से लगे गांव श्रीकोट को जाने वाली सड़क जो 20 वर्ष पहले बन गई थी था का भी डामरीकरण जल्दी होने की उम्मीद करता हूं।
#नमोनारायण
गजेन्द्र सिंह चौहान पुरोला
संपादक नमो न्यूज

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