राजनीति में धुर विरोधी कब एक हो जाय ये भविष्य ही जानता है। मगर इन दो महापुरुषों में एकता हो जाय तो ये तय है कि कौन उठेगा व कौन गिरेगा । Only the future knows when arch rivals will unite in politics. But if there is unity between these two great men then it is certain who will rise and who will fall. ।

 राजनीति में धुर विरोधी कब एक हो जाय ये भविष्य ही जानता है। मगर इन दो महापुरुषों में एकता हो जाय, तो ये तय है कि कौन उठेगा व कौन गिरेगा ।


राजनीति के सह मात के खेल में में कब क्या हो जाय ये अनिश्चित है अर्थात पहले से निर्धारित नहीं है। हमने बड़े बड़े सेक्यूलरों को कट्टरपंथी बनते देखा व बड़े बड़े कट्टरपंथियों को वामपंथी बनते देखा है। तो फिर पुरोला की राजनीति में एक दूसरे के घोर विरोधी जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण व पूर्व ब्लॉक प्रमुख पुरोला लोकेंद्र रावत कैसे एक नहीं हो सकते है ।

आइये दोनों के राजनीतिक चरित्र पर सूक्ष्म प्रकाश डालते हुए आगे बढ़ते हैं। दोनों ही महापुरुष छात्र राजनीति करते करते वर्ष 2008 में जनता के आशीर्वाद से बीडीसी मेंबर बनते है व आपसी सहयोग से लोकेंद्र रावत ब्लॉक प्रमुख बनते है। दोनों ही व्यक्ति छात्र जीवन से कांग्रेस से जुड़े हैं व कितनी आंधियां आई व तूफान गुजर गए पर दोनों ही कांग्रेस से टस से मस नहीं हुए । खैर बाद के वर्षों में दीपक जिला पंचायत सदस्य बनते हैं व उसके बाद एक नया खिलाड़ी इन दोनों के बीच खट्टास का मुख्य कारण बनता है। उक्त खिलाड़ी लोकेंद्र रावत के सहयोग से चुनाव जीतता है व उक्त नए खिलाड़ी के खिलाफ उत्पन्न एंटी इनकंबेसी यानी सत्ता विरोधी लहर का नुकसान लोकेंद्र रावत को उठाना पड़ता है व वर्ष 2019 में लोकेंद्र व दीपक के बीच जिला पंचायत के लिए हुए मुकाबले में बाजी दीपक के पक्ष में जाती है।

खैर दोनों में एक बात समान है, दोनों ही कांग्रेस के मजबूत स्तम्भ हैं। 

दीपक से चुनाव हारने के बावजूद लोकेंद्र ने पार्टी लाइन से इतर दीपक का विरोध नहीं किया हैं। पुरोला की राजनीति में खास अहमियत रखने वाले दिनेश चौहान नमो न्यूज से बातचीत में दोनों के बीच एकता की वकालत करते हैं। वे कहते है कि पुरोला में आने वाले समय में विभिन्न पदों पर सही प्रतिनिधि का चुना जाना अत्यंत आवश्यक है। अन्यथा पुरोला भ्रष्टाचार के दलदल में इतना फंस चुका है कि यहां हो रहा विकास विनाश व जनता का काल बन रहा है। वे कहते है कि दोनों की एकता हो तो सही जनप्रतिनिधियों का चुनाव होगा व विकास फिर से गति पकड़ेगा ।

अस्वीकरण:- उपरोक्त कथन किसी व्यक्ति विशेष के न तो खिलाफ  ओर न ही महिमामंडन करने के उद्देश्य से लिखा गया है। 

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