आगामी नगर पालिका चुनाव को लेकर रंवाई जन एकता मंच के बैनर तले पुरोला नगर पालिका अध्यक्ष हेतु मेरी उम्मीदवारी के प्रति कुछ लोगों ने संदेह जताया है कि मैं पवन नोटियाल के खिलाफ किसी षड्यंत्र का शिकार हुआ हु ।
यहां मैं पवन नोटियाल के साथ अपने संबंधों पर आप लोगों के बीच कुछ बाते साझा करना आवश्यक समझता हूं। जैसे कि आप सभी जानते है कि पवन नोटियाल किसी परिचय के मोहताज नहीं है व वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के जिला महामंत्री है व संभवतः आगे जिलाध्यक्ष भी बन सकते है। विगत 5 वर्षों में पवन नोटियाल के साथ मेरे संबंध काफी मधुर बने हैं। जिसकी मुख्य वजह उनके हेल्पफुल नेचर का होना है। वर्ष 2020 में जब कोरोना महामारी के चलते भारत सरकार ने पूरे देश में लॉक डाउन लगा दिया था । तब मित्र पुलिस के चोरी छिपे सहयोग करने के चलते लोग अपने गंतव्य स्थानों को पहुंचे। ऐसी हालत में मेरा परिवार भी देहरादून में फंस गया था ओर जो सगे संबंधी देहरादून से आ रहे थे उन्होंने मेरे परिवार को अपने साथ पुरोला लाना लाजमी नहीं समझा। उस हालत में जब मैने इन्हीं निकटतम संबंधियों से उनका वाहन देने की बात कही तो सभी लोग चुप्पी साध गए । तब यही पवन नोटियाल थे जिन्होंने मुझे अपनी सेवाएं ऑफर की थी । मैं वो आदमी नहीं हु जो किसी के अहसानों की कीमत न समझे , यही नहीं पवन नोटियाल ने समय समय पर मुझे आर्थिक तरक्की करने में अपना सहयोग दिया । पवन नोटियाल द्वारा विगत पांच वर्षों में जो सहयोग किया गया उसका मै ओर मेरा परिवार सदेव ऋणी रहेगा ।
बात अब ये आती है कि फिर क्या हुआ कि अब मेरा समर्थन पवन नोटियाल को न होकर खुद मैं उमीदवार बन गया। तो आइए तो इसकी पृष्ठभूमि में भाजपा के दूसरे दावेदार उपेन्द्र असवाल अथवा राधे -राधे की भी बात कर लेते है । उपेन्द्र असवाल पवन नोटियाल के पड़ोसी है व विगत चुनाव में दोनों पड़ोसियों ने एक दूसरे के खिलाफ लड़ा है। उपेन्द्र असवाल मेरे बड़े भाई हैं व मेरी बुआ के बड़े बेटे है। बचपन से ही बड़े भाई मेरे हीरो रहे है, जब कभी बाजार जाता था तो नजरे बस बड़े भाई को ही तलाश करती थी , कारण रसगुल्ला तो बड़े भाई ही खिलाते थे । ऐसे में ज्वलंत प्रश्न ये भी उठ सकता है कि बड़े भाई भाजपा के सशक्त दावेदार हैं व आप उनकी जड़े काट रहे हो । तो इसका जवाब अगले दावेदार के बारे में प्रकाश डालने से मिल जायेगा।
भारतीय जनता पार्टी से जिस तीसरे व्यक्ति ने अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी पेश की है वो है बृजमोहन सिंह चौहान जो कि पुरोला व्यापार मंडल के अध्यक्ष हैं, उपेन्द्र असवाल के छोटे भाई व पवन नोटियाल के पड़ोसी हैं। बृजमोहन चौहान इसके अतिरिक्त मेरे सगे भाई हैं। आपने विगत साथ वर्षों में मुझे आर्थिक तरक्की करने में सर्वाधिक योगदान दिया है। तो फिर सवाल उठाना लाजमी है कि मेरा सहयोग इनको भी क्यों नहीं है। तो इसका पहला जवाब तो ये है कि उपरोक्त तीनों व्यक्ति पड़ोसी व रिश्तेदार होने के बावजूद एक दूसरे के साथ नहीं है। पर इसका जवाब पूरी तरह देने से पहले चौथे दावेदार के बारे में जानने से पता चलेगा।
भारतीय जनता पार्टी से चौथे व्यक्ति दावेदारी पेश करने वालों में अगला नाम लोकेश उनियाल का है। लोकेश उनियाल जी बृजमोहन चौहान के पड़ोसी व रिश्तेदार हैं। लोकेश उनियाल का भी मेरे ऊपर बहुत बड़ा योगदान है, लॉक डाउन में जब मेरा मोबाइल टूट गया था तब इन्होंने मुझे अपना मोबाइल दिया व लगातार मेरा सहयोग करते रहे। अब प्रश्न फिर से उठेगा कि लोकेश उनियाल को समर्थन क्यों नहीं, तो इसका जवाब बाकी के अन्य तीन दावेदारों के बारे में प्रकाश डालने से मिल चुका होगा।
मैने समय समय पर उपरोक्त चारों दावेदारों को पड़ोसी धर्म निभाकर एकजुटता का परिचय देने का आग्रह किया। पर जवाब यही मिला कि जिसको टिकट मिलेगा हम उसके साथ है पर हम एकता नहीं करेंगे।
उपरोक्त बातों को मद्देनजर रखते हुए मै आप चारों से क्षमा मांगता हु ओर उम्मीद करता हु कि आप चारों आगामी नगर पालिका चुनाव में मेरा सहयोग करेंगे।
धन्यवाद
आपका स्नेही
गजेन्द्र सिंह चौहान


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