स्थानीय देवी देवताओं व संस्कृति के खिलाफ बड़ी साजिश । भ्रष्टाचार पहुंचा चरम पर । 20 जुलाई से प्रस्तावित व्यापार मेले को स्थानीय विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, भाजपा जिलाध्यक्ष, व्यापार मंडल व जनप्रतिनिधियों के दबाव में एसडीएम पुरोला ने किया था रद्द । अब 5 अगस्त से लगेगा फिर से मेला । Big conspiracy against local deities and culture. Corruption reached its peak. The trade fair proposed from July 20 was canceled by SDM Purola under pressure from the local MLA, District Panchayat President, BJP District President, Trade Board and public representatives. Now the fair will be held again from 5th August.

 गजेन्द्र सिंह चौहान, पुरोला

 विधायक दुर्गेश्वर लाल, जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण, भाजपा जिलाध्यक्ष सतेंद्र राणा , व्यापार प्रतिनिधियों व स्थानीय जनप्रतिनिधियों के दबाव में कशिश खादी को मिली मेला लगाने की अनुमति को एसडीएम पुरोला ने रद्द कर दिया था । किंतु किसी न किसी की सह पर उनके सामान को पुरोला में ही सुरक्षित रखा गया ताकी मेले को कोर्ट या किसी हायर ऑथोरिटी के माध्यम से दुबारा लगाया जा सके ।


यद्दपि भ्रष्टाचार के इस खेल में पता नही कितने लोग हमाम में नहाये हुये है तथापि ये स्थानीय देवी देवताओं के प्रभुत्व को खत्म करने की बड़ी साजिश है ।विदित हो कि सावन के माह में गांव गांव में स्थानीय देवी देवताओं के मेले लगे होते हैं, जिसमें दूर दूर से लोग दर्शन को आते हैं किंतु मेला लगने के कारण लोग स्थानीय संस्कृति से दूर भागकर फूहड़ गानों की धूम के साथ मेले में जाएंगे । जिसका नतीजा ये होगा कि लोगों की आस्था देवताओं में कम होगी जिससे मेला आयोजित करने वाले व्यापारियों को भारी मुनाफा होगा  , जिसका वे अंशभर भी स्थानीय स्तर पर खर्च नही करेंगे ।


नमोन्यूज से बातचीत में जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण ने आपदकाल में मेला आयोजित कराने की मंशा पर सवालिया निशान खड़ा किया व इसको स्थानीय देवी देवताओं के खिलाफ बड़ी साजिश करार दिया है ।


वही स्थानीय विधायक मेला लगाने पर पहले भी शक्त एतराज जता चुके हैं व उन्हीं के दबाव में मेला रद्द किया गया था । वही भाजपा जिलाध्यक्ष भी मेले का पुरजोर विरोध कर चुके हैं । बावजूद स्थानीय प्रशासन देवी देवताओं के खिलाफ हो रही साजिश का हिस्सा बना व कशिश खादी को किसी उच्चस्तरीय अधिकार प्रसप्त एजेंसी पर जाने का मार्ग दिखाया व जबतक उन्हें मेले की अनुमति नही मिली तबतक उन्हें सुरक्षा मुहैया कराता रहा ।


इस बाबत स्थानीय व्यापार मंडल पहले भी पुरजोर विरोध जता चुका है । देखते हैं स्थानीय देवी देवताओं के खिलाफ इस साजिश का आगे क्या होगा । किन्तु एक बात सर्वविदित है कि भ्रष्टाचार चरम पर है ।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ