पुरोला से सनसनीखेज खुलासा । विभागीय अधिकारियों व एनजीओ की मिलीभगत से हुआ बड़ा खेला । जिलाधिकारी उत्तरकाशी को गुलदस्ता भेंटकर दिया ज्ञापन । Sensational revelation from Purola. A big game was played due to the collusion of departmental officials and NGOs. Memorandum given by presenting a bouquet to District Magistrate Uttarkashi.

 गजेन्द्र सिंह चौहान, पुरोला

 पुरोला घाटी को रामा सेराई व कमल सेराई नाम से ख्याति प्राप्त है । इस घाटी की प्रसिद्धि की प्रमुख बजह है सेराई का प्रसिद्ध चरधान यानी कि लाल चावल । अब इसी लाल चावल के साथ बड़ा खेला होने की उड़ती खबर आ रही है ।


हुआ ये की चरधान यानी कि लाल चावल सम्पूर्ण उत्तराखंड में केवल पुरोला घाटी यानी सेराई में ही पैदा होता है । इसके अलावा आंशिक रूप से चरधान मोरी व बड़कोट तहसील के कुछ गांवों में भी उत्पादित होता है ।

अब खबर ये आ रही है कि सेराई के इस प्रसिद्ध चावल को GI टैग यानी कि जिओग्राफिकेल इंडिकेटर का टैग मिला है । जो कि सरसरी तौर पर खुशखबरी है ।किंतु विभागीय अधिकारियों व एनजीओ की मिलीभगत से ये टैग किसी एनजीओ के नाम हुआ है जिसका पुरोला से सम्बंध नही है ।


 जीआई टैग में विभागीय अधिकारियों व एनजीओ की मिलीभगत को लेकर भाजपा नेता राजपाल पंवार के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने जिलाधिकारी उत्तरकाशी से भेंटकर उन्हें गुलदस्ता भेंटकर ज्ञापन सौंपा । ज्ञापन में पुरोला के नाम जीआई टैग दिलवाले की मांग की गई ।


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