गजेन्द्र सिंह चौहान , पुरोला- उत्तरकाशी
आज की व्यंग्य कथा ।
जैसा कि आप सभी पाठकों को विदित है कि पुरोला विधानसभा में इस वक्त दो ईमानदार अधिकारियों का माफियाओं पर कहर जारी है ।
अवैध खनन आंशिक रूप से बंद है, जंगल से गुली व फ़राटा माफिया भाग गये है । चारो ओर माफियाओं में त्राहिमाम मचा हुआ है । ऐसे में पुरोला विधानसभा के एक नेता ने केके दम्पति को यहां से उखाड़ फेंकने का जिम्मा लेते हुए एक मंत्री के घर के आगे धरना दे दिया । मांग केके दम्पति के ट्रांसफर की थी पर बात जाती सूचक शब्द पर पहुंच गई । उक्त नेता ने मंत्री पर जाती सूचक शब्द बोलने का आरोप लगाते हुए न्याय की मांग की । पर अगले ही दिन उक्त नेता पलतुराम सिद्ध हुए व जिस मंत्री पर जाती सूचक शब्द बोलने का आरोप लगाया उन्ही से माफी मांगते हुए उन्हें पिता तुल्य बताया ।
खैर बात तीन दिन पहले की है कि जब एक गांव में उक्त नेता ने बड़ा जोरदार भाषण देते हुए ऐलान किया कि मैंने केके दंपति का ट्रांसफर कर दिया है पर ट्रांसफर लेटर नही दिखाया । जो मेरी जनता के खिलाफ होगा मैं उसका ट्रांसफर करूंगा । उन्होंने कहा कि मैंने एसडीएम का भी ट्रांसफर करवाया है, यहां ये भी बता दु की एसडीएम का अतिक्रमण पर सख्त रवैये की वजह से उक्त नेता उनके पीछे पड़े थे ।
अब बता दु की जैसे ही इनको पुरोला की जनता ने नेता बनाया इन्होंने मोरी विकास खण्ड से ईमानदार कर्मचारियों को ट्रांसफर करने का जैसे बीड़ा ही उठा लिया था । इस लिस्ट में सबसे पहला नाम आया एक पटवारी का जिन्हें उत्तरकाशी जनपद के पटवारियों में सर्वाधिक ईमानदार के रूप में जाना जाता है । फिर माफियाओं के लिए सरदर्द बने एक पंचायत मंत्री को भी रुखसत किया गया । आगे बारी थी माफियाओं पर लगाम लगाने वाले एक रेंजर की , रेंजर को तो सीधे ऑफिस अटेच ही करवा दिया व बाद में किसी तरह उनका भी ट्रांसफर कर दिया गया ।
यही नही इस लिस्ट में विभिन्न विभागों के अधिशासी अभियंताओ सहित अन्य कर्मचारीगण भी शामिल रहे है ।
नेताजी सिर्फ एक काम नही कर पाए वो भी अपने गांव की सड़क को पक्की कराने का ।
खैर बात केके की हो रही है तो नमोन्यूज द्वारा दी गई केके दंपति की उपाधि अब पूरे उत्तराखंड में प्रसिद्ध हो गई है व बात प्रधानमंत्री मोदी तक पहुचे तभी कुछ राहत मिलेगी । दरसल डर सिर्फ केके दम्पति की ईमानदारी से डरने की नही है अपितु केके दम्पति ने ये भी सिद्ध कर दिया कि पढ़ा लिखा किसे कहते हैं । केके दम्पति भारत की संसद द्वारा बनाये गए वन अधिनियम का अक्षरस अनुपालन कर रहे है जो माफियाओं को बिल्कुल भी अच्छा नही लग रहा है ।
यहां सबसे बड़ा सवाल ये है कि अगर केके दम्पति को पुरोला विधानसभा से ट्रांसफर किया जाता है तो फिर उन्हें कहा भेजा जाय । क्योंकि केके जहां भी जाएंगे वहाँ न तो खाएंगे ओर न खाने देंगे ।
तो फिर जनहित में यही उचित होगा कि प्रधानमंत्री मोदी ईमानदारी व कानून की समझ रखने वाले अधिकारियों को केंद्र में बुला ले । जिससे भ्रष्टाचार की पनाहगाह उत्तराखंड को ईमानदार अधिकारियों से मुक्ति मिल सके ।
अस्वीकरण: इस पोस्ट का उद्देश्य सिर्फ नमोन्यूज के पाठकों का मनोरंजन व ईमानदार अधिकारियों की छवि को प्रदर्शित करना है । इसका किसी जातिवाद का जहर घोलने वाले नेता व ईमानदार अधिकारियों से नफरत करने वाले किसी भी नेता से कोई संबंध नहीं है ।

0 टिप्पणियाँ