डीएफओ अतार्थ केके दंपति का ट्रांसफर न करा पाने से हताश पुरोला के नेता ने अब नगर पंचायत परिसर में आयोजित बैठक में करा दिया हंगामा । संविधान निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती पर बने थे पलटुराम । पहले मंत्री पर लगाया था जातिसूचक भाषा बोलने का आरोप अगले दिन माफी मांग बताया पिता तुल्य । Frustrated with not being able to get the transfer of DFO Atarth KK couple, the leader of Purola created a ruckus in the meeting organized in the Nagar Panchayat premises. Palturam was made on the birth anniversary of Constitution maker Dr. Bhimrao Ambedkar. First the minister was accused of using caste based language, he apologized the next day and said that he was like a father.

  गजेन्द्र सिंह चौहान, पुरोला- उत्तरकाशी

आज का व्यंग्य

 भ्रष्टाचारियों व माफियाओं की शरणस्थली पुरोला विधानसभा में यू तो एक से बढ़कर एक भ्रष्ट अधिकारी कार्यरत हैं जो वन एवम खनन माफियाओं के लिए वरदान है । पिछले 2 वर्षो में पुरोला के नये नवेले जनप्रतिनिधि के उदय से तो जैसे खनन व वन माफियाओं के लिए पुरोला स्वर्ग बन गया था । गुल्ली व फर्राटे के नाम पर इतना अवैध कटान हो गया कि जंगल मे ढूंढने पर भी लकड़ी नही मिल रही थी ।  अवैध खनन करने वाले के वारे न्यारे हो रहे थे ।


वन व खनन माफियाओं के रास्ते मे रोड़ा अटकाने वाले 3 डीएफओ, एक रेंजर व एक पटवारी का ट्रांसफर करवा दिया गया । यही नही अन्य विभागों से भी खुलकर भ्रष्टाचार न करने वाले अधिकारियों के ट्रांसफर कर दिये गए । कुल मिलाकर भ्रष्टाचार व अवैध खनन के रास्ते मे जो भी आया उसे यहां से रुक्सत कर दिया गया ।

लेकिन नेताजी से गलती तब हो गई जब इन्होंने संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग तो किया किंतु आयोजको के मुख से अपनी प्रशंसा न होने से गुस्से में मंच छोड़कर भाग खड़े हुए । संविधान निर्माता की जयंती पर मंच छोड़ना आयोजको का एक बहुत बडा अपमान था व वहां से सुरु हुई गलती के बाद नेताजी अब बौखलाहट में ऐसे सलाहकारों से घिर चुके है जिन्होंने अतीत में कई नेताओं को पतन का रास्ता दिखाया है ।

आइए अब बात करते हैं डीएफओ दम्पति के ट्रांसफर की मुहिम की जिसमें ये अबतक असफल ही सिद्ध हुए हैं । चाहे वो एक मंत्री के घर पर धरने की हो या मंत्री पर जातिसूचक भाषा का आरोप हो या उसी मंत्री को पिता तुल्य बताना  , कुल मिलाकर उक्त नेता पलटूराम ही सिद्ध हुए हैं ।

 जब से केके दम्पति ने पुरोला विधानसभा के अंतर्गत टोंस वन प्रभाग, अपर यमुना वन प्रभाग का डीएफओ व गोविंद नेशनल पार्क उप निदेशक का पदभार संभाला है । तबसे अवैध खनन, अवेध पातन व अवेध बटियाओ का निर्माण बिल्कुल बन्द हो गया है व नेताजी को ये सब अच्छा नही लग रहा है । इस वजह से उनका सुगर तक बढ़ गया है ।

डीएफओ का ट्रांसफर न करा पाने से हताश नेताजी ने दो दिन पहले अपने कुछ दर्जन समर्थकों से एक जुलूस प्रदर्शन भी कराया पर बात उससे भी नही बनी है । हताश नेता ने कुछ दिन पहले एक गांव में छाती ठोककर ये भी कहा कि मैंने डीएफओ का ट्रांसफर कर दिया है ।

खैर भ्रष्टाचारियों व माफियाओं की संगति से घिरे नेताजी अब इतने बौखला गये की पुरोला में हर वर्ष होने वाले शरदोत्सव मेले को लेकर आयोजित बैठक में अपने समर्थकों से हंगामा करा दिया । बात दरसल ये थी कि नेताजी के अधिकांश समर्थक वन व खनन माफिया हैं व उन्हें मेला कराने का कोई अनुभव है नही । जाहिर है अनुभवहीन लोगो को आयोजन समिति में कोई स्थान देना अनुचित था तो नेताजी के इशारे पर उनके समर्थक वन व खनन माफियाओं ने बैठक में हंगामा कर दिया ।


अस्वीकरण:  उपरोक्त व्यंग्य को नमोन्यूज के सुधि पाठकों के मनोरंजन व  भ्रष्टाचार के आधुनिक संस्करण से रूबरू कराने के लिए लिखा गया है । इसका भ्रष्टाचार के समर्थक, अवैध खनन व अवैध पातन के समर्थन में डीएफओ के खिलाफ धरने पर बैठने वाले कीसी भी नेता से कोई सीधा सम्बंध नही है ।

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