गजेन्द्र सिंह चौहान
व्यंग्य लेख
इस व्यंग्य का मोजू ये है कि विधायक महोदय पत्रकार महोदय को फोन करते हैं, राजी- खुसी जानने के बाद विधायक महोदय आग बबूला होकर अन्य पत्रकार को समजाने की बात करते हैं । विधायक महोदय अमुक पत्रकार से इसलिए खफा है कि उन्होंने उनके पीआरओ से उस आरोप के बारे में जानकारी मांगी थी जो उनके किसी सहयोगी ने विधायक पर लगाये थे । फोन पर विधायक जी बहुत नाराज दिखते हैं व अमुक पत्रकार को माँ की गाली के साथ साथ मानहानि की चेतावनी भी देते हैं ।
बातचीत में विधायक अपनी पीठ ठोकते हुए कहते हैं कि उन्होंने जो कमीशन 25 प्रतिशत होती थी उसको 15 प्रतिशत करा दिया है । विधायक महोदय ये भी कहते हैं कि वे किसी भी तरह की कमीशन न तो खाते हैं ओर न ही कमीशन खोरी को प्रमोट करते हैं । बातचीत में वे अमुक पत्रकार को चेतावनी देते हैं व पत्रकार महोदय से उनको समझाने की बात करते हैं ।
व्यंग्य का शेष अगले अंक में ,
Disclamer ( अस्वीकरण)
ये व्यंग्य लेख नमोन्यूज़ के पाठकों के मनोरंजन के लिए है व वर्तमान में राजनीतिक चरित्र पर प्रकाश डालने की खातिर है । इसका किसी भी विधायक व पत्रकार से सीधा संबंध नही है । यद्दपि आजकल की राजनीति में गाली-गलौच व कमीशनखोरी की चर्चा आम जुबान पर होती है, चाहे विधायक हो, पत्रकार या आम जनता कमीशनखोरी पर बात करना कोई गुनाह नही माना जाता है ।

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