Crackdown on corruption of KK couple in Purola Assembly area. There was political mobilization for the transfers of Ranger Jwala Prasad, who stood against corruption, to DFO Baluni.

 पुरोला विधानसभा में में केके दंपति का भ्रष्टाचार पर शिकंजा,  । भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े रेंजर ज्वाला प्रसाद से लेकर DFO बलूनी तक के तबादलों के लिए हुई थी राजनीतिक लामबन्दी ।


गजेन्द्र सिंह चौहान, पुरोला-उत्तरकाशी

 भ्रष्टाचार के लिए प्रसिद्ध पुरोला विधानसभा का गोविंद नेशनल पार्क व टोन्स वन प्रभाग पुरोला अब तक तमाम भ्रष्ट अधिकारियों व ठेकेदारों को खाकपति से करोड़ पति बना चुका है । उत्तराखंड सचिवालय में पुरोला विधानसभा के ठेकेदारों के जो दिलखोलकर भ्रष्ट अधिकारी व बाबू अबतक स्वागत करते आये हैं वो अब नही होने वाला है । 


बताते चले कि पुरोला विधानसभा में विकासकार्यो का आगणन अभी तक भ्रष्ट अधिकारी ठेकेदारों से कराते आये हैं, तमाम निर्माण एजेंसियों के भ्रष्ट अधिकारी चाहे पीडब्ल्यूडी हो, सिंचाई, फॉरेस्ट हो या जल संस्थान इन्ही ठेकेदारों के बूते विकासकार्यो पर निर्भर है ।

अभी तक जो भी ईमानदार अधिकारी इन भ्रस्ट ठेकेदारों के राह में रोड़ा बने उनपर उल्टा भ्रष्टाचार के आरोप लगा संस्पेंस या ऑफिस अटैच करवाया गया । इसका ज्वलंत उदाहरण रेंजर ज्वाला प्रसाद है जिन्होंने एक ठेकेदार के विकास कार्यो की एमबी 18 हजार की बनाई व उसपर अन्य दो रेंजर्स ने भी हस्ताक्षर किए थे । किंतु इसके बाद उनको ऑफिस अटैच करवाया जाता है व ठेकेदार को गोविंद नेशनल पार्क पूरी पेमेंट कर देता है ।

गोविंद नेशनल पार्क में इससे पूर्व उप निदेशक रहे डीपी बलूनी ने भी इन भ्रस्ट ठेकेदारों पर नकेल कसने की कोशिस की पर उनके खिलाफ भी राजनेताओं के अर्नगल बयानबाजी पिछले दिनों खूब वायरल हुई । अंततः बलूनी को जनपद मुख्यालय में डिएफओ बनाकर इन ठेकेदारों को खुश कर दिया गया ।


लेकिन ठेकेदारों के लिए मुसीबत बना देवदार के सैकड़ों पेड़ो का अवैध पातन का जिन्न, जिसकारण अब तक दर्जनभर से अधिक अधिकारी व कर्मचारियों पर गाज गिर चुकी है ।

वन माफियाओं व खनन माफियाओं के लिए मुसीबत बने केके को डिएफओ का चार्ज मिलते ही मची खलबली

अबतक भ्रष्टाचार के गोरखधंधे से अधिकारी, कर्मचारी व ठेकेदारों सहित उत्तराखंड सचिवालय के भ्रस्ट अधिकारी व बाबु खूब चांदी काट रहे थे । किंतु  कुंदन कुमार यानी केके के आते ही हर तरफ सन्नाटा है यहां तक कि फोटो कॉपी का व्यवसाय करने वालो के यहां पर बिक्री पर भारी असर पड़ा है ।केके की नियुक्ति होते ही कुछ लोगो ने विधायक दुर्गेश्वर लाल के आवास पर पहुंचकर तत्काल डिएफओ द्वारा उठाये गए कदमो को रोकने की मांग कर दी , किंतु विधायक भी इस मामले में कुछ कर पाने में असमर्थ रहे ।

मामला सिर्फ इतना ही तक रुकता तो बात कुछ नही थी । उस पर डिएफओ पुरोला की धर्मपत्नी डॉक्टर अभिलाषा को डिएफओ अपर यमुना वन प्रभाग के साथ ही उप निदेशक गोविंद नेशनल पार्क का जिम्मा सौंपा दिया गया । केके दंपति की पुरोला विधानसभा के अंतर्गत टोंस वन प्रभाग व गोविंद नेशनल पार्क में नियुक्ति होते ही अर्नगल विकास कार्यो पर विराम लग गया । कार्यो पर विराम के साथ ही पूर्व में किये गए फर्जी विकासकार्यो की जांच भी सुरु कर दी । अब इन जांचों से ठेकेदारों के साथ कर्मचारियों में भी दशहत है ।

देखना ये है कि जॉच अंजाम तक पहुंचती है या ठेकेदार व राजनेताओं का भ्रष्ट गठजोड़ केके दंपति का तबादला करवाने में सफल रहते हैं ।

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