पुरोला, 25 साल की उम्र में बाप का साया उठ जाए तो अच्छे खासे टूट जाते हैं पर पिता के आकस्मिक मौत के बाद आंचल ने संभलकर मशरूम का उत्पादन शुरू किया ।
आँचल रावत बताती है कि उनके पिता ने उन्हें प्रेरणा दी की हमे अपने पैरों पर खड़ा होकर एक मिसाल कायम करनी चाहिए व उनकी प्रेरणा से वो मशरूम उत्पादित कर रही है व आगे कीड़ा जड़ी पर भी काम करेंगे ।
बताते चलें कि पुरोला के मखना गाँव की आंचल मे
ने एग्रीकल्चर में चार वर्षीय डिग्री करने के बाद नौकरी के स्थान पर रोजगार खड़ा कर एक मिसाल कायम की ।
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