पुरोला, बीएल0 जुवांठा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मरीजों के लिए बना रेफरल सेंटर।
बरफियालाल जुवांठा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पुरोला सामान्य मरीजों,प्रसव पीड़िता महिलाओं को उपचार देने की बजाय रैफरल सैंटर बन कर रह गया है। दो महिला व तीन पुरूष चिकित्सकों समेत चार नर्सिग स्टाफ तैनात होने के बाद भी रात इंमरजेंसी सेवा को कोई देखने वाला नहीं,अधिकांश समय इमरजेंसी केस आने पर घंटों के इंतजार करनें के बाद डाक्टर-नर्सिग स्टाफ मरीज को हालचाल व उपचार करने की बजाय हायर सेंटर को रेफर किया जाता है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के हालात इस कदर हैं कि दूरदराज गांव से आनेवाली प्रसव बेदना से पीड़ित महिलाओं को गुजरना पडता है जो प्रसव को रात्रि में किसी तरह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तो पंहुच जाती है किंतु इंमरजेंसी सेवारत् नर्सिग स्टाफ-डाक्टर का घंटों इंतजार के बाद भी उपचार तो दूर बगैर जांच पड़ताल के डाक्टर सीधे हायर सैंटर रैफर की पर्ची थमा देते हैं जिसके चलते आये दिन अधिकांश प्रसव पीडिताओं की रास्ते में सामान्य रूप से बच्चे को जन्म देती है या कईयों की रास्ते में मौत हो जाती है।
बुधवार को तहसील मुख्यालय के नजदीकी गांव कुमार कोट की प्रीति राणा पत्नी जय भूवन को प्रसव पीड़ा के चलते देर सांय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया,जहां पर पीड़िता एक घंटे तक दर्द से करहाती रही किंतु कोई भी डॉक्टर,नर्सिंग स्टाफ ने महिला की सुध तक नहीं ली। महिला के साथ आये परिजन त्रिभूवन सिंह ने बताया कि कई बार--बुलानें पर डॉक्टर अस्पताल तो आये लेकिन पीड़ित की बगैर जांच करे देहरादून के लिए रेफर कर दिया,जंहा देहरादून ले जाते मसूरी के केंपटी फॉल के पास रात 1:00 बजे महिला ने स्वस्थ व सामान्य रूप से बच्चे को जन्म दिया।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डिक्टिर्स व स्टाफ की लापरवाही व स्वास्थ्य सुविधाओं का आलम इस कदर हैं कि बीते सप्ताह को पुरोला के ही बेस्टी गांव की गर्भवती रक्सीना पत्नी अरविंद सिंह को प्रसव पीडा के चलते सीएचसी लाया गया जंहा चिकित्सकों ने उसे देहरादून रेफर कर दिया किंतु देहरादून ले जाते नौगांव के पास ही महिला ने दम तोड दिया ।

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