8 दिसम्बर को कतिथ किसानों द्वारा भारत बंद का आयोजन किया गया है, उक्त किसान केंद्र सरकार द्वारा बनाये गये कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं ।
ज्ञात हो कि विगत 11 दिनों से कतिथ किसानों ने दिल्ली को घेर रखा है जिनमेसे अधिकतर पंजाब कांग्रेस व अकाली दल के कार्यकर्ता है ।
यानी कि कतिथ किसान आंदोलन पंजाब की कांग्रेस सरकार व अकाली दल के साझा प्रयास से सुरु किया गया है ।
किसानों का विरोधी क्यो हैं ये किसान आंदोलन
आपको बता दे कि उक्त किसान आंदोलन पूरी तरह से किसानों के खिलाफ खड़ा किया गया आंदोलन है । नये कृषि कानूनों के बनने से छोटे किसानों द्वारा उत्पादित उच्च गुणवत्ता के उत्पादों की मांग बढ़ने व छोटे किसानों की फसलों की कीमत कतिथ किसानों से ऊंची मिलने से कतिथ किसानों को बड़ी दिक्कतें हो रही है ।
इसीलिए कतिथ किसान नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं ।
निम्न गुणवत्ता अनाज पैदा करते हैं कतिथ किसान
आपको ये भी बता दे कि विरोध करने वालो में अधिकतर किसान ओ है जो पराली तक को जला देते हैं, जबकि छोटे किसान इसी पराली को अपने पशुओं को खिलाकर जैविक खेती करते हैं ।
धरना देने वाले किसान रासायनिक खादों व दवाइयों के उपयोग से जहरीली फसलों को तैयार करते हैं जो कि हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है ।
नक्सलियों द्वारा आंदोलन को समर्थन
कतिथ किसानों द्वारा सुरु किये गये आंदोलन को नक्सल विचारधारा के नेेताओं का पूर्ण समर्थन बताया जा रहा है , यहां तक की राजनीति में फेेेल योगेंद्रर यादव को इस आंदोलन से खुराक मिली हैै, अब ओ खुद ही लाईव होकर अपने किसान नेता बता रहे हैं ।

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