सम्पादकीय
इंसान गलतियों का पिटारा है , जीवन मे जाने अनजाने इंसान न जाने कितनी गलतियों को करता हैं ।
हमारे द्वारा की गई गलतियों का असर न जाने कहाँ कहा पड़ता हैं , यही गलतियां हमारे सम्बन्धो को भी परिभाषित करते हैं ओर इन गलतियों से सम्बन्ध बिगड़ते हैं ।
गलतियों को सुधारने के लिए अंग्रेजी का एक शब्द अक्सर मुझे बहुत अच्छा लगता है , जब सन 2008 में बहुचर्चित सत्यम घोटाला हुआ था तब खबर में सुना था कि सत्यम के एमडी अब नाम याद नही ने कंफेसड किया कि सत्यम दिवालिया हो गई है ।
यद्यपि ओ बहुत बड़ी गलती थी पर अगर गलतियों पर पर्दे पर पर्दा डालने का क्रम जारी रहता तो शायद बड़ी देर हो जाती लेकिन राजू ( शायद यही नाम है) ने कंफेसड कर मामले को सरकार के हवाले कर दिया जिससे हजारों लोगों की नोकरी भी बच्च गई व सत्यम भी बच्च गई ।
कहने का मतलब यही है कि जब जागो तब सबेरा, यानी कि जब लग जाय कि बहुत बड़ी गलती हो चुकी है तो ग़लती की छुपाने के लिये पर्दे पर पर्दा डालने के लिये ओर गलतियों को करने की अपेक्षा कन्फेस कर लेने में ही सबकी भलाई है ।
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