उमेश शर्मा काऊ के समर्थन में अनिल धानु ने कहा समाजहित में बाधा बनती जा रही है व्यग्तिगत रंजिश

 अंकित नौटियाल

 अनिल धानु ने प्रेस नोट जारी कर कहा कि उत्तराखंड में अभी जो चल रहा है उसे ही गन्दी पॉलिटिक्स कहते हैं।  


उन्होंने कहा कि यहां प्रतिनिधियों का मुखिया ही भेदभाव पे उतर आया है। बता दें कि विधानसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक लगा चुके प्रदेश के सर्वाधिक लोकप्रिय जनप्रतिनिधि, रायपुर विधानसभा के विधायक उमेश शर्मा 'काऊ'  आजकल अपनी ही सरकार में दरकिनार हो रहे है। बताते चले कि डोईवाला विधानसभा और रायपुर विधानसभा की सीमाएं लगती हैं। डोईवाला का महत्व यह है कि वर्तमान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत यहीं से निर्वाचित हुए हैं। अब एक मुख्यमंत्री अपनी विधानसभा के विकास के लिए सोचे/करे तो अच्छी बात है ,लेकिन, मुख्यमंत्री दुर्भावनावश किसी लक्षित क्षेत्र की विकास योजनाओं को बन्द करवा दे, यह तो नाइंसाफी है न! एक तरफ डोईवाला विधानसभा क्षेत्र के लिए सवा सौ से भी ज्यादा विकास परियोजनाएं चल रहीं/कई पूरी हो चुकी हैं; तो दूसरी तरफ तो रायपुर के लिए गिनकर चार-पांच कार्ययोजनाएं, उनमें भी अड़ंगा। अब आप खुद सोचिए, एक मुखिया को यह शोभा देता है। दरअसल, 2012 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत, उमेश शर्मा से हार गए थे, यह उमेश शर्मा 'काऊ' का पहला ही चुनाव था। शायद उस हार को वर्तमान मुख्यमंत्री अभीतक पचा नही पाए हैं और कुर्सी की शक्ति के भरोसे एक लोकप्रिय जनप्रतिनिधि की लोकप्रियता को बट्टा लगाना चाहते हैं। चहेतो को टेंडर दे देना, विधायकों के विकास कार्य को रोकना आदि गतिविधियां अब प्रदेश में आम हो चुकी हैं। सबसे बढ़कर, जनप्रतिनिधि डॉक्यूमेंटेड प्रूफ के साथ घूम रहे ताकि न्यायसंगत कार्य हो, जनहित में विकास कार्य हो। ख़ैर, जनता तो जनार्दन है, सब देखती-समझती है। हम आज भी उमेश शर्मा काऊ  की उसी जीवटता को देखते हैं जिसका परिचय वह हमेशा देते हैं। क्षेत्र की जनता से उनकी कितना प्यार है यह लॉकडाउन में सबने देखा और, जनता उनसे कितना प्यार करती है यह तो लगातार तीन बार से सभी देख रहे हैं। हम विधायक उमेश शर्मा के नैतिक बल वृद्धि हेतु ईश्वर से प्रार्थना करते हैं, साथ ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत  रायपुर में भी विकास की गंगा बहाये इसके लिए भी ईश्वर से विनती करते हैं।

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