पुरोला में सिंचाई विभाग व मनरेगा विभाग की लापरवाही इस बार किसानों पर भारी तो पड़ी है लेकिन इस लापरवाही से एक बहुत बड़े भ्रष्टाचार की बू आनी स्वभाविक है ।
पूरा माजरा क्या है
हर वर्ष पुरोला में नगर पँचायत पुरोला के किसानों की खेती के लिए बनी नहरो का अनुरक्षण सिंचाई विभाग कराता है । लेकिन इस वर्ष पहले खूब बारिश होने की बजह से किसान सिंचाई विभाग में नहरो को ठीक कराने के लिए आंदोलन करने नही गए जिस कारण न ही किसानों को ओर ना ही सिंचाई विभाग को नहरों को ठीक कराने की जहमत उठानी पड़ी ।
जून में जब रोपाई सुरु हुई ।
किन्तु हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी जब रोपाई का समय आया तो किसानों ने सिंचाई विभाग की तरफ ताकने के अपेक्षा चंदे की मदद से तिरपाल खरीदकर खुद ही नहर में पानी चला दिया ।
सिंचाई विभाग के जेई को कुछ नहरो का सर्वे करते देखा गया
नहरों की मरम्मत जब किसानों ने खुद कर दी व नहरो में पानी चढ़ गया उसके बाद नहरों की सफाई करते हुए 5 मजदूर देखे गए जिन्होंने बताया था कि उन्हें मनरेगा के तहत इस नहर की सफाई के लिए कहा गया ।
यहां असली प्रश्न ये है कि नगर पंचायत के अंतर्गत तमाम नहरों की मरम्मत खुद ही किसानों के द्वारा की गई थी तो मनरेगा के तहत 5 मजदूरों की तैनाती का मतलब क्या है ।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इस दौरान सिंचाई विभाग के जेई को भी कुछ लोगो के साथ इन तमाम नहरो का सर्वे करते हुये देखा गया, जिस बजह से इस पूरे मामले में कुछ न कुछ गड़बड़ी जरूर लगती है ।
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