महावीर रवांल्टा को शब्दनिष्ठा सम्मान -2020

 महावीर रवांल्टा को शब्दनिष्ठा सम्मान -2020    

              पुरोला। साहित्यकार एवं रंगकर्मी महावीर रवांल्टा को पुस्तक समीक्षा के लिए अजमेर (राजस्थान) के प्रतिष्ठित शब्दनिष्ठा सम्मान-2020से सम्मानित किया जाएगा।



शब्दनिष्ठा द्वारा अखिल भारतीय स्तर पर पुस्तक समीक्षा के लिए आयोजित प्रतियोगिता में देशभर से जिन 36 समीक्षकों का चयन सम्मान के लिए हुआ है उसमें उत्तराखण्ड के महावीर रवांल्टा भी शामिल हैं। प्रतियोगिता के संयोजक डॉ अखिलेश पालरिया की ओर से मिली जानकारी के अनुसार उन्हें स्मृति चिन्ह,प्रशस्ति पत्र व नगद धनराशि देकर सम्मानित किया जाएगा।


10 मई 1966 को उतरकाशी जिले के सुदूर सरनौल गांव में जन्मे महावीर रवांल्टा साहित्य की विभिन्न विधाओं में सृजन करते हुए अब तक तीन दर्जन पुस्तकें हिन्दी साहित्य जगत को दे चुके हैं। रंगमंच एवं लोक साहित्य में गहरी रुचि के कारण उन्होंने रंग लेखन के साथ ही अनेक नाटकों का निर्देशन व अभिनय भी किया है। साहित्य के क्षेत्र में सराहनीय योगदान के लिए देशभर की अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा उन्हें पुरस्कृत व सम्मानित किया जा चुका है। उनके कथा साहित्य पर विभिन्न विश्वविद्यालयों में लघुशोध एवं शोध प्रबंध प्रस्तुत हो चुके हैं। आकाशवाणी व दूरदर्शन से उनकी रचनाओं का प्रसारण होता रहा है।उनकी कहानियों- ' खुली आंखों में सपने' व ' ननकू नहीं ‌रहा' पर आधारित नाटकों का राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की संस्कार रंग टोली ,कला दर्पण,मांडी विद्या निकेतन (दिल्ली)व विशेष बाल श्रमिक विद्यालय (अगवाल,खुर्जा)द्वारा नाट्य मंचन हो चुका है।भाषा- शोध एवं प्रकाशन केन्द्र वडोदरा (गुजरात) के भारतीय भाषा लोक  सर्वेक्षण , उत्तराखंड भाषा संस्थान के भाषा सर्वेक्षण, पहाड़ (नैनीताल) के बहुभाषी शब्दकोश के लिए रवांल्टी पर काम कर चुके महावीर रवांल्टा को ही रवांल्टी के पहले कविता संग्रह ' गैणी जण आमार सुईन' को सामने लाने का श्रेय भी जाता है।इन दिनों वे अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र आराकोट में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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