शराब की फैक्ट्री पहाडी किसानो के नहीं बीजेपी कांग्रेस के हित मे इं० डीपीएस रावत
य०ूके०डी (डेमोक्रेटिक) पूर्व लोकसभा गढ़वाल प्रत्याशी - चौबट्टाखाल विधानसभा प्रभारी इं०डीपीएस रावत ने कहा कि पिछ्ले 20 सालो से भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस की नीति सिर्फ पहाड़ो को बिनास करने की रही हैं।
बन मंत्री हरक सिंह, और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के उस बयान की कड़े शब्दों मे निंदा की। जिसमे दोनों दलों ने कहा था कि शराब की फैक्ट्री पहाडी किसानों के हक़ मे हैं।
अगर दोनों सरकारों की साफ़ नियत होती बिकास की तो सायद। नशा मुक्त प्रदेश बनाकर उसको स्वरोजगार प्रदेश के विकास के पथ पर लेकर जाते, लेकिन आज प्रदेश बीजेपी कांग्रेस की सरकारों ने काफी जिलो मे शराब के कारखाने खोल दिये हैं।
हरिद्वार, देवप्रयाग रुद्रपुर, सतपुली आदि जिलो मे।
पर उसमे भी रोजगार बाहरी प्रदेश के लोगो को मिला!
आज प्रदेश मे बेरोजगारो की फ़ौज जमा हैं पर सरकार उनके लिये कोई अच्छी पालिसी नहीं ला पाई हैं।
आज जो भी पोलिसी केन्द्र व प्रदेश सरकार लाई हैं सब पार्टीयो के कार्यकर्ताओं को ही उसका फायदा हो रहा हैं। जो बेरोजगार हैं कुछ स्वरोजगार करना चाहता हैं पहाड़ो मे रहना चाहता हैं, उसके लिये कोई योजना नहीं हैं। आज प्रदेश मे यह हालाता हैं कि पडोशी राज्यो के लोगो को सरकारी नौकरियों पर रखा जा रहा हैं। क्यों कि नेताओं की मिली भगत हैं, जो यहां के मूल निवासी हैं। वह और राज्यो मे 5,10 हजार रुपयों की तनख्वा मे काम करने के लिये मजबूर हैं?
प्रदेश मे अपार रोजगार करने के साधन हैं पर सरकार यहां के मूल निवासियों की कोई परवाह नहीं कर रही हैं। आज यहां पर छेत्रिय पार्टी की सरकार होती तो जरूर पहाड़ो के मुदो पर काम करती, रास्ट्रीय पार्टी प्रदेश का भला कभी नहीं कर सकती हैं, क्यों कि उनके पास रास्ट्रीय मुदे ही होते हैं, वह उन्ही मुदो पर काम करती हैं। आज प्रदेश मे इंटरनेशनल बिज़नेस पार्क, व सिंगल विंडो की जरूरत हैं,
हर जिलो मे छोटी-छोटी मिनी स्मार्ट सिटी बनाने की जरूरत हैं सरकार को, जिस हिसाब से जनसंख्या बढ़ रही हैं केन्द्र-राज्य सरकार के पार कोई योजना नहीं हैं, सरकार को इस बिषय मे गंभीरता से सोचना चाहिये।
डीपीएस रावत ने कहा कि वह पिछ्ले 15,20 सालो से प्राइवेट सेक्टर मे सलाहकार रहे हैं, उन्होने दिल्ली मेट्रो, रेलवे, स्मार्ट सिटी, (इडीएफसी) दिल्ली मुम्बई कॉरिडोर, के कई प्रोजेक्ट पर कंसल्टेंसी की हैं, अब जमाना बदल चुका हैं नए युग का जमाना हैं डिजिटल का युग सुरु हो चुका हैं पर सरकार वही 20 साल पुरानी गम्भीर सोच मे आजतक डूबी हैं,

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