मरीज के जगह पशुओं ने जमा रखा हैं अस्पताल में डेरा ,स्टेट एलोपैथिक डिस्पेंसरी में लटके रहते हैं ताले।--धूल फांक रहे हैं एस0ए0डी0 कुमोला के भवन।।

पुरोला।।                                ----आधा दर्जन गांव के स्वास्थ्य का जिम्मा लिए स्टेट एलोपैथिक डिस्पेंसरी में लटके रहते हैं ताले। 
                            ----धूल फांक रहे हैं एस0ए0डी0 कुमोला के भवन।।                                        पुरोला विकासखण्ड के कोरना- कुमोला में दसकों से बने स्टेट एलोपैथिक डिस्पेंसरी में डॉक्टर्स के न होने से मरीज नही बल्कि,पशुओं का बसेरा बना है।करोड़ों की लागत से बने डॉक्टर्स आवास एवम चिकित्सालय की हालत देख कर स्पस्ट होता है कि स्वास्थ्य महकमे की लापवाही से मरीज नही बल्कि पशुओं का बसेरा बना है।

 नौरी,कुमोला,पुजेली,कोरना,मैती, हिरालनी,ठकराड़ी आदि गांवों की स्वास्थ्य सुविधा के लिए बने स्वास्थ्य केंद्र में न तो कोई डॉक्टर आता है ना ही कोई फार्मासिस्ट और वार्ड बॉय केवल दिखाई दे रही हैं तो स्वास्थ्य विभाग की करोड़ों से बनी जर्जर यह इमारतें और प्रांगण में पशु धूप शेकते एवं चुंगते।                              ग्रामीणों अमीन सिंह नेगी,सरदार सिंह,कुलदीप सिंह,चैन सिंह, खजान सिंह आदि ने जानकारी देते हुए बताया कि स्टेट एलोपैथिक डिस्पेंसरी को खुले दशकों हो गए लेकिन कोई स्थायी डॉक्टर और फार्मासिस्ट नही आये पिछले वर्ष एक दन्त चिकित्सक को भेजा गया था लेकिन अब वह भी नही आते हैं।वंही एक एलोपैथिक फार्मासिस्ट की ब्यवस्था की गई थी लेकिन ओ भी महीने में दो-तीन सप्ताह ही आते हैं ग्रामीणों ने यह भी जानकारी दी कि यंहा एक आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट की नियुक्ति भी है लेकिन अभी तक हमने उनको देखा भी नही।अगर यंहा डॉक्टर,फार्मासिस्ट होते तो कम से कम ग्रामीणों को प्राथमिक उपचार तो मिलता और भवनों की रेखदेख होती जिसके चलते प्राथमिक उपचार के लिए भी पुरोला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ