कुलदीप चौहान
क्यों मनाया जाता है माघ त्यौहार , क्या है इसके पीछे राज देखे पूरी खबर
पौराणिकता के दृष्टिकोण से
नरभक्षी किरमीर नामक राक्षस के अत्याचारों से मुक्ति मिलने की खुशी में जनजाति क्षेत्र जौनसार बावर के लोग हर साल पौष मास में माघ मरोज पर्व को परंपरागत अंदाज में धूमधाम से मनाते हैं जिसकी शुरुआत हनोल के कईलू देवता मंदिर से होती है जहां प्रतिवर्ष 26 गते पौष को चुरास का पहला बकरा चढ़ाया जाता है इसके बाद समूचे इलाके में इस पर्व को मनाने की परंपरा है । इस बार जनजाति क्षेत्र जौनसार बावर के कईलू मंदिर हनोल में 10 जनवरी को चुरास का बकरा चढ़ेगा जौनसार बावर में प्रति वर्ष जनवरी माह में मनाए जाने वाले माघ मरोज पर्व का विशेष महत्व है। इसके पीछे नरभक्षी राक्षस के आतंक से जुड़ी घटना बताई जाती है लोक मान्यता अनुसार सैकड़ों वर्ष पहले जौनसार बावर के तमसा नदी तट पर जिसे पहले कर्मनाशा नदी कहा जाता था वहां किरमीर राक्षस का आवास हुआ करता था नरभक्षी कहे जाने वाले इस राक्षस को प्रतिदिन एक मानव बलि चाहिए होती थी जिस कारण इलाके में मानव जीवन खतरे में पड़ गया इस राक्षस के अत्याचारों से मुक्ति पाने के लिए हुणाभाट नामक ब्राह्मण ने कुल्लू कश्मीर जाकर सरवर ताल के पास कठोर तपस्या कर मानव जीवन को बचाने के लिए भगवान से प्रार्थना की इसके बाद चार महासू देवता मेंदरथ और हनोल में प्रकट हुए और महासू देवता के सबसे पराक्रमी सेनापति कईलू वीर ने राक्षस का वध कर दिया राक्षस के मारे जाने की खुशी में समूचे इलाके में लोगों ने घर-घर बकरे काटे और जश्न मनाया बताया जाता है कि 26 गते पौष मास राक्षस का खात्मा किया गया जिसके बाद से अब तक समूचे इलाके में लोग इस पर्व को माघ मरोज के जश्न के रूप में मनाते आ रहे हैं
विज्ञान (साइंस) के दृष्टिकोण से
विज्ञान की दृष्टिकोण से कहा जाता है कि पहाड़ी इलाकों में अधिक बर्फबारी होने के कारण आवागमन के साधन, रास्तों से संपर्क टूट जाता था यहां तक की घर के दरवाजे खुलने मुश्किल हो जाते थे अपने जीवन को सुरक्षित रखने के लिए हर परिवार में बकरा काटा जाता था और काट कर चोटे चोटे पीस बना कर जिस कमरे में चूल्हा जलता था उसमें लटका दिया जाता था क्योंकि धूएं से खराब और कीड़ा नहीं लगता , और पूरे महिने सेवन किया जाता था जिस कारण अधिक टेंपरेचर घिरने के बाद भी शरीर का टेम्परेचर बना रहता था और असल में ये जरुरी भी है और आज भी यही परंपरा विद्धमान है ।
क्यों मनाया जाता है माघ त्यौहार , क्या है इसके पीछे राज देखे पूरी खबर
पौराणिकता के दृष्टिकोण से
नरभक्षी किरमीर नामक राक्षस के अत्याचारों से मुक्ति मिलने की खुशी में जनजाति क्षेत्र जौनसार बावर के लोग हर साल पौष मास में माघ मरोज पर्व को परंपरागत अंदाज में धूमधाम से मनाते हैं जिसकी शुरुआत हनोल के कईलू देवता मंदिर से होती है जहां प्रतिवर्ष 26 गते पौष को चुरास का पहला बकरा चढ़ाया जाता है इसके बाद समूचे इलाके में इस पर्व को मनाने की परंपरा है । इस बार जनजाति क्षेत्र जौनसार बावर के कईलू मंदिर हनोल में 10 जनवरी को चुरास का बकरा चढ़ेगा जौनसार बावर में प्रति वर्ष जनवरी माह में मनाए जाने वाले माघ मरोज पर्व का विशेष महत्व है। इसके पीछे नरभक्षी राक्षस के आतंक से जुड़ी घटना बताई जाती है लोक मान्यता अनुसार सैकड़ों वर्ष पहले जौनसार बावर के तमसा नदी तट पर जिसे पहले कर्मनाशा नदी कहा जाता था वहां किरमीर राक्षस का आवास हुआ करता था नरभक्षी कहे जाने वाले इस राक्षस को प्रतिदिन एक मानव बलि चाहिए होती थी जिस कारण इलाके में मानव जीवन खतरे में पड़ गया इस राक्षस के अत्याचारों से मुक्ति पाने के लिए हुणाभाट नामक ब्राह्मण ने कुल्लू कश्मीर जाकर सरवर ताल के पास कठोर तपस्या कर मानव जीवन को बचाने के लिए भगवान से प्रार्थना की इसके बाद चार महासू देवता मेंदरथ और हनोल में प्रकट हुए और महासू देवता के सबसे पराक्रमी सेनापति कईलू वीर ने राक्षस का वध कर दिया राक्षस के मारे जाने की खुशी में समूचे इलाके में लोगों ने घर-घर बकरे काटे और जश्न मनाया बताया जाता है कि 26 गते पौष मास राक्षस का खात्मा किया गया जिसके बाद से अब तक समूचे इलाके में लोग इस पर्व को माघ मरोज के जश्न के रूप में मनाते आ रहे हैं
विज्ञान (साइंस) के दृष्टिकोण से
विज्ञान की दृष्टिकोण से कहा जाता है कि पहाड़ी इलाकों में अधिक बर्फबारी होने के कारण आवागमन के साधन, रास्तों से संपर्क टूट जाता था यहां तक की घर के दरवाजे खुलने मुश्किल हो जाते थे अपने जीवन को सुरक्षित रखने के लिए हर परिवार में बकरा काटा जाता था और काट कर चोटे चोटे पीस बना कर जिस कमरे में चूल्हा जलता था उसमें लटका दिया जाता था क्योंकि धूएं से खराब और कीड़ा नहीं लगता , और पूरे महिने सेवन किया जाता था जिस कारण अधिक टेंपरेचर घिरने के बाद भी शरीर का टेम्परेचर बना रहता था और असल में ये जरुरी भी है और आज भी यही परंपरा विद्धमान है ।





1 टिप्पणियाँ
You gave a scientific reason that is very necessary for young generation to understand their myth and belief🙏
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