क्या आप जानते हैं कि एबीपी और बजरंग दल के गुंडे एक गुट बनाकर जेएनयू के छात्रों पर हमला करने के लिए किस चोर दरवाजे से आए थे?
अगर नहीं जानते हैं तो जान लीजिए कि वह चोर दरवाजा दिल्ली पुलिस का था। क्योंकि वहां मौजूद छात्रों की दी गई जानकारी के द्वारा पुलिस गेट पर खड़ी थी, अंदर कैंपस में कुछ प्रोफेसर्स मीटिंग कर रहे रहे थे, 40 50 गुन्डे जिनमें से अधिक तर ने अपने मुंह पर कपड़े लपेट रखे थे पुलिस ने अपनी मौजूदगी में उन्हें अंदर आने दिया, उन्होंने पुलिस के नजरों के सामने मीटिंग कर रहे प्रोफेसर्स और वहां पर मौजूद स्टूडेंट्स पर हमला किया, फिर यह गुंडे वहां से हॉस्टल की तरफ बढ़े और अपने रूम में मौजूद स्टूडेंट्स को पकड़कर मारना पीटना शुरू किया, हॉस्टल्स के स्टूडेंट्स ने अपने रूम बंद कर लिए बाहर से दरवाजा पिटा जाने लगा और उनमें से कुछ के नाम लेकर उन्हें गाली दी जाने लगी, सामने जो मिलता गया उन पर हमला किया गया, पुलिस यह तमाशा अपनी आंखों से देखती रही मगर उन गुंडों को जिन्हें पुलिस ने खुद ही अंदर भेजा था रोकने की जरूरत महसूस नहीं की, अगर जेएनयू के छात्रों की माने तो उनका कहना यह है कि पुलिस यह चाहती थी के जेएनयू के छात्र भी उस गुंडों से भिड़ जाएँ ताकि पुलिस को जेएनयू के छात्रों पर भी क्रैकडाउन का मौका मिले।क्योंकि पुलिस आंसू गैस और दूसरी चीजें लेकर खड़ी यह इन्तजार देख रही थी कि कब जेएनयू के छात्र कोइ गलती करें और उन पर भी क्रैकडाउन किया जाए लेकिन जेएनयू के छात्रों ने मार खाने के बाद भी अपनी तरफ से कोई वायलेंस क्रिएट नहीं किया क्योंकि उन्होंने भाॅप लिया था कि पुलिस का इरादा जामिया मिलिया और एएमयू के छात्रों पर किए गए क्रैकडाउन की तरह यहां के छात्रों पर भी क्रैकडाउन करना है।
अभी भी जिस वक्त यह बात लिखी जा रही है यानी रात के 12बजे जेएनयू के स्टूडेंट्स ग्राउंड में खड़े हैं। धारा 144 लागू किया जा चुका है फिर भी गेट के बाहर एबीपी और बजरंग दल के गुंडे अंदर आने की कोशिश कर रहे हैं। और पुलिस तमाशा देख रही है। जामिया मिलिया एएमयू और दूसरी जगहों पर पीसफुल प्रोटेस्ट करने वालों पर गोली चलाने वाली पुलिस 144 के बावजूद गेट पर मौजूद एबीपी के गुंडों पर लाठीचार्ज करने की भी मर्दानगी नहीं रखती ऐसे में अगर यह कहा जाए कि वह खाकी वर्दी जो देश के नियमों की रक्षा करने के लिए थी आज देश के नियमों को तोड़ने का कार्य कर रही है जिससे पूरा देश शर्मसार है तो कोई गलत बात नहीं होगी।
अगर नहीं जानते हैं तो जान लीजिए कि वह चोर दरवाजा दिल्ली पुलिस का था। क्योंकि वहां मौजूद छात्रों की दी गई जानकारी के द्वारा पुलिस गेट पर खड़ी थी, अंदर कैंपस में कुछ प्रोफेसर्स मीटिंग कर रहे रहे थे, 40 50 गुन्डे जिनमें से अधिक तर ने अपने मुंह पर कपड़े लपेट रखे थे पुलिस ने अपनी मौजूदगी में उन्हें अंदर आने दिया, उन्होंने पुलिस के नजरों के सामने मीटिंग कर रहे प्रोफेसर्स और वहां पर मौजूद स्टूडेंट्स पर हमला किया, फिर यह गुंडे वहां से हॉस्टल की तरफ बढ़े और अपने रूम में मौजूद स्टूडेंट्स को पकड़कर मारना पीटना शुरू किया, हॉस्टल्स के स्टूडेंट्स ने अपने रूम बंद कर लिए बाहर से दरवाजा पिटा जाने लगा और उनमें से कुछ के नाम लेकर उन्हें गाली दी जाने लगी, सामने जो मिलता गया उन पर हमला किया गया, पुलिस यह तमाशा अपनी आंखों से देखती रही मगर उन गुंडों को जिन्हें पुलिस ने खुद ही अंदर भेजा था रोकने की जरूरत महसूस नहीं की, अगर जेएनयू के छात्रों की माने तो उनका कहना यह है कि पुलिस यह चाहती थी के जेएनयू के छात्र भी उस गुंडों से भिड़ जाएँ ताकि पुलिस को जेएनयू के छात्रों पर भी क्रैकडाउन का मौका मिले।क्योंकि पुलिस आंसू गैस और दूसरी चीजें लेकर खड़ी यह इन्तजार देख रही थी कि कब जेएनयू के छात्र कोइ गलती करें और उन पर भी क्रैकडाउन किया जाए लेकिन जेएनयू के छात्रों ने मार खाने के बाद भी अपनी तरफ से कोई वायलेंस क्रिएट नहीं किया क्योंकि उन्होंने भाॅप लिया था कि पुलिस का इरादा जामिया मिलिया और एएमयू के छात्रों पर किए गए क्रैकडाउन की तरह यहां के छात्रों पर भी क्रैकडाउन करना है।
अभी भी जिस वक्त यह बात लिखी जा रही है यानी रात के 12बजे जेएनयू के स्टूडेंट्स ग्राउंड में खड़े हैं। धारा 144 लागू किया जा चुका है फिर भी गेट के बाहर एबीपी और बजरंग दल के गुंडे अंदर आने की कोशिश कर रहे हैं। और पुलिस तमाशा देख रही है। जामिया मिलिया एएमयू और दूसरी जगहों पर पीसफुल प्रोटेस्ट करने वालों पर गोली चलाने वाली पुलिस 144 के बावजूद गेट पर मौजूद एबीपी के गुंडों पर लाठीचार्ज करने की भी मर्दानगी नहीं रखती ऐसे में अगर यह कहा जाए कि वह खाकी वर्दी जो देश के नियमों की रक्षा करने के लिए थी आज देश के नियमों को तोड़ने का कार्य कर रही है जिससे पूरा देश शर्मसार है तो कोई गलत बात नहीं होगी।
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