जेएनयू में क्यो होता हैं राष्ट्रविरोधी ड्रामा, भारत तेरे टुकड़े होंगे जैसे नारे क्यो लगते है, नवक्रान्ति स्पोक्सपर्सन ने ऐसे दिखाई भटके हुए वामपंथी को राह

इतिहास से यदि लेना-देना नहीं रखेंगे तो इसी तरह  गुमराह होते रहेंगे.. जैसे कि आप JNU को लेकर हो रहे हो..  अफजल गुरु को फांसी की सजा सुनाई जाती है तब भी जेएनयू में ड्रामा होता है, भारत तेरे टुकड़े होंगे जैसे नारे लगते हैं,  जम्मू कश्मीर से धारा 370 और 35a हटाई जाती है तब भी जेएनयू में राष्ट्र विरोधी ड्रामा होता है,  और अब नागरिकता संशोधन बिल पर भी जेएनयू में  राष्ट्र विरोधी ड्रामा होता है उपद्रव किया जाता है ..
और यह उपरोक्त सभी मामले राजनीतिक नहीं राष्ट्रहित के थे
 आपको क्या लगता है यह सब गतिविधियां करने वाले विद्यार्थी है? आप विद्यार्थियों की संज्ञा देंगे?   इसीलिए मैंने आपसे प्रश्न किया था कि  वामपंथ क्या है?  वामपंथ का यह अंतिम अड्डा शेष रह गया है जहां से एक प्लान मिशन के तहत राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को अंजाम दिया जाता है और विद्यार्थियों का राष्ट्र के विरुद्ध ब्रेनवाश करने का काम किया जाता है.. 

 दूसरी बात आप देस की दुर्दशा की बात कर रहे हो..  बिल्कुल आपकी इस बात से पूरी तरह सहमत हैं, और जो बात आप आज कर रहे हो वह हमने 5 साल पहले देस की दुर्दशा के सारे अंदरूनी पहलुओं को बहुत करीबी से देख लिया था जिसकी फल स्वरुप नवक्रांति संगठन का जन्म हुआ.. यह संगठन इसलिए नहीं बना था की आज की पढ़ी-लिखी युवा पीढ़ी की सोच राजनीतिक नेताओं तक सीमित रहे या उनको समर्पित रहे जो देस की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार है और खुद कूटनीति वाली राजनीति करके शाही बन चुके हैं..  बल्कि  इस उम्मीद के साथ इस संगठन को बनाया था कि भविष्य में हमारे देस की पढ़ी-लिखी युवा पीढ़ी अपने देस की वास्तविकता को देखते हुए इस संगठन का महत्व समझे । लेकिन दुर्भाग्य आज भी देस की पढ़ी-लिखी युवा पीढ़ी की बड़ी संख्या अपने आत्म स्वार्थ को सिद्ध करने और झूठी शान दिखाने के लिए नेताओं को पूरी तरह समर्पित है । बेहतर होगा कि आप यह उपरोक्त सलाह उन युवाओं को दें , उन्हें जागरूक करें जो नेताओं के भक्त बने बैठे हैं ।

 तीसरी बात नवक्रांति एक विचारधारा है, जो एक सामाजिक संगठन के रूप में रजिस्टर्ड है, भले ही यह संगठन राजनीति से सरोकार नहीं रखता लेकिन राष्ट्र हित के लिए अपनी विचारधारा और अपने विजन से हमेशा  विचारणीय रहेगा..  राष्ट्र की संदर्भ में स्वस्थ परिचर्चा इस विचार का एक हिस्सा है.. इस संगठन और इस विचारधारा की संकुचित सोच कभी नहीं  रहनी चाहिए..

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