जीरो से हीरो तक का सफर: हरिमोहन जुवांठा पुरोला में कांग्रेस के सशक्त दावेदार के रूप में उभरे
बैंक मैनेजर की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए हरिमोहन जुवांठा, चार वर्षों से गांव-गांव जाकर बना रहे जनसंपर्क। पूर्व कैबिनेट मंत्री स्व. बीएल जुवांठा के भतीजे हरिमोहन के सामने परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती।
पुरोला (उत्तरकाशी)। राजनीति में अपनी पहचान बनाने के लिए निरंतर मेहनत और जनता के बीच सक्रियता जरूरी होती है। पुरोला विधानसभा क्षेत्र में हरिमोहन जुवांठा इन दिनों इसी राह पर आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं। बैंक मैनेजर की प्रतिष्ठित नौकरी छोड़कर राजनीति में कदम रखने वाले हरिमोहन आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों में अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं।
हरिमोहन जुवांठा का संबंध पुरोला की एक राजनीतिक रूप से चर्चित जुवांठा परिवार से है। वह उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय बीएल जुवांठा के भतीजे हैं। पूर्व विधायक राजेश जुवांठा के आकस्मिक निधन के बाद परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब हरिमोहन के कंधों पर आ गई है।
पिछले चार वर्षों से हरिमोहन जुवांठा पुरोला विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों का लगातार भ्रमण कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित करने और क्षेत्र की समस्याओं को समझने पर जोर दिया है। गांव-गांव में जनसंपर्क के जरिए वह आम लोगों के बीच अपनी पहचान और स्वीकार्यता बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।
बैंकिंग क्षेत्र की नौकरी से राजनीति तक का उनका सफर कई मायनों में खास है। एक ओर जहां उनके सामने परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर अपनी अलग पहचान बनाने की भी जिम्मेदारी है।
हरिमोहन जुवांठा की लगातार सक्रियता और जनसंपर्क को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, कांग्रेस पार्टी उन्हें प्रत्याशी बनाती है या नहीं और जनता उनके प्रयासों को किस रूप में स्वीकार करती है, यह आने वाला समय ही बताएगा।
फिलहाल, हरिमोहन जुवांठा क्षेत्र में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। अब देखना यह होगा कि उनकी वर्षों की मेहनत चुनावी राजनीति में कितनी सफलता दिला पाती है।

0 टिप्पणियाँ