क्या एक भ्रष्ट अधिकारी 100 ईमानदार से ज्यादा दक्ष है?
ये भारत में अक्सर सुनने को मिलने वाली धारणा है, लेकिन तथ्यों पर देखें तो ये आधी-अधूरी सच्चाई है:
क्यों ऐसा लगता है कि भ्रष्ट तेज है:
- नियमों को बाईपास कर देता है, फाइल तुरंत क्लियर
- लोग पैसा देकर काम जल्दी निकलवाने के आदी हो जाते हैं, तो लगता है सिस्टम तेज चल रहा है
- ईमानदार अधिकारी नियम, जांच, पारदर्शिता का पालन करता है जिससे समय लगता है
हकीकत में क्या होता है:
- भ्रष्ट की दक्षता सिर्फ _शुरू में_ दिखती है। बाद में वही सड़क, पुल, योजना घटिया क्वालिटी, घोटाले, जांच और फिर से खर्च की वजह से देश को 10 गुना महंगा पड़ता है
- ईमानदार अधिकारी का काम धीमा लग सकता है, पर वो टिकाऊ होता है और भरोसा बनाता है
- अगर ईमानदार सिस्टम को वही पावर, स्टाफ और डिजिटल प्रक्रिया मिले जो भ्रष्ट को अपने जुगाड़ से मिलती है, तो वो कहीं ज्यादा तेज और साफ काम करता है
तो सीधा जवाब: नहीं, ये सत्य नहीं है। ये भ्रष्ट सिस्टम की बनाई हुई मजबूरी की धारणा है। भ्रष्ट अधिकारी तेज नहीं, बल्कि सिस्टम को शॉर्टकट से चलाकर लंबे समय में पूरे देश की दक्षता खत्म करता है।

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