एल नीनो का असर—भारत में कमजोर मानसून और बढ़ती गर्मी की आशंका
नई दिल्ली। वैश्विक जलवायु प्रणाली में बदलाव लाने वाली घटना एल नीनो एक बार फिर भारत के मौसम पर असर डालने की स्थिति में है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2026 में एल नीनो के कारण देश में सामान्य से कम बारिश और अधिक गर्मी देखने को मिल सकती है।
🌧️ मानसून पर पड़ेगा असर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर का पानी गर्म हो जाता है, जिससे वैश्विक हवाओं का पैटर्न बदल जाता है। इसका सीधा असर भारतीय मानसून पर पड़ता है और अक्सर कम या कमजोर बारिश देखने को मिलती है।
भारत में मानसून देश की कुल वर्षा का लगभग 70% हिस्सा देता है, ऐसे में इसकी कमजोरी का बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।
🌡️ बढ़ सकती है गर्मी
एल नीनो के कारण बादलों की कमी और बारिश में गिरावट से तापमान बढ़ने की संभावना रहती है। इससे हीटवेव जैसी स्थितियां भी पैदा हो सकती हैं।
🌾 कृषि और अर्थव्यवस्था पर खतरा
कम वर्षा का सीधा असर खेती पर पड़ता है।
- धान, गेहूं, सोयाबीन जैसी फसलों का उत्पादन घट सकता है
- खाद्य कीमतों में वृद्धि (महंगाई) हो सकती है
- बिजली और जल संसाधनों पर भी दबाव बढ़ सकता है
⚠️ सूखे की आशंका, लेकिन पूरी तरह निश्चित नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि हर एल नीनो वर्ष में सूखा पड़े, यह जरूरी नहीं है। कुछ अन्य कारक जैसे भारतीय महासागर की स्थितियां (IOD) इसके प्रभाव को कम भी कर सकती हैं।
📌 निष्कर्ष
एल नीनो भारत के मौसम के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है, जो मानसून, तापमान और कृषि को प्रभावित करता है। 2026 में इसके प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ रही है, हालांकि अंतिम स्थिति मानसून के दौरान ही स्पष्ट होगी।
👉 कुल मिलाकर, एल नीनो का मतलब है—कम बारिश, ज्यादा गर्मी और खेती पर दबाव।

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