बड़ी खबर | बांग्लादेश चुनाव; बांग्लादेश में बीएनपी बढ़त की ओर — भारत के लिए क्यों अहम? भारत-बांग्लादेश सुरक्षा सहयोग पर पड़ सकता है असर

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बांग्लादेश में बीएनपी बढ़त की ओर — भारत के लिए क्यों अहम?

▪️ शेख हसीना सरकार के बाद बदल सकती है ढाका की नीति


▪️ भारत-बांग्लादेश सुरक्षा सहयोग पर पड़ सकता है असर

▪️ सीमा सुरक्षा व घुसपैठ का मुद्दा फिर बन सकता है चुनौती

▪️ चीन-पाकिस्तान की बढ़ सकती है सक्रियता

▪️ व्यापार, ट्रांजिट रूट और पूर्वोत्तर कनेक्टिविटी पर भी प्रभाव संभव

👉 नई दिल्ली की कूटनीति की होगी असली परीक्षा

Namo News | पड़ोसी पर नज़र, देश पर असर


बांग्लादेश में बीएनपी जीत की ओर अग्रसर, भारत-बांग्लादेश संबंधों पर क्या पड़ेगा असर?

ढाका/नई दिल्ली। बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। शुरुआती रुझानों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) बढ़त बनाती दिख रही है। यदि शेख हसीना की अवामी लीग सत्ता से बाहर होती है और बीएनपी सरकार बनाती है, तो इसका असर केवल ढाका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत की सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय कूटनीति पर भी सीधा प्रभाव पड़ेगा।

1. भारत की सुरक्षा पर असर

पिछले डेढ़ दशक में शेख हसीना सरकार भारत की सबसे भरोसेमंद पड़ोसी सरकारों में मानी गई।

पूर्वोत्तर भारत के उग्रवादी संगठनों पर बांग्लादेश ने कड़ी कार्रवाई की थी।

कई आतंकियों को भारत को सौंपा गया और सीमा पार ठिकाने खत्म किए गए।

बीएनपी का अतीत अलग रहा है। पहले के कार्यकाल (2001-06) में भारत विरोधी संगठनों की सक्रियता और आईएसआई की मौजूदगी को लेकर भारत ने चिंता जताई थी।

👉 इसलिए नई बीएनपी सरकार बनने पर भारत को फिर सीमा सुरक्षा, घुसपैठ और पूर्वोत्तर उग्रवाद को लेकर सतर्क रहना पड़ सकता है।

2. चीन-पाकिस्तान फैक्टर

विशेषज्ञों का मानना है कि:

अवामी लीग संतुलन रखते हुए भारत के करीब रही

जबकि बीएनपी पारंपरिक रूप से चीन और पाकिस्तान के अधिक नजदीक मानी जाती है

अगर ढाका की विदेश नीति बदली तो:

बंगाल की खाड़ी में चीन की रणनीतिक पकड़ बढ़ सकती है

भारत के “एक्ट ईस्ट” और “नेबरहुड फर्स्ट” नीति को झटका लग सकता है

3. व्यापार और अर्थव्यवस्था

भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार 15-18 अरब डॉलर से अधिक का हो चुका है।

भारत को मिलने वाले बड़े फायदे:

पूर्वोत्तर राज्यों के लिए ट्रांजिट रूट

चिटगांव और मोंगला बंदरगाह का उपयोग

बिजली निर्यात

नई सरकार यदि नीतियां बदले तो:

ट्रांजिट समझौते प्रभावित हो सकते हैं

सीमा व्यापार और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट धीमे पड़ सकते हैं

4. अवैध प्रवास (इमिग्रेशन) मुद्दा

यह सबसे संवेदनशील विषय माना जाता है।

राजनीतिक अस्थिरता या कट्टरपंथ बढ़ने की स्थिति में:

भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध घुसपैठ बढ़ने की आशंका

खासकर असम, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा प्रभावित हो सकते हैं

5. जल बंटवारा समझौते

तेस्ता नदी जल समझौता पहले से अटका है। नई सरकार आने पर:

वार्ता और जटिल हो सकती है

पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी असर पड़ेगा

भारत की संभावित रणनीति

भारत की नीति आमतौर पर सरकार नहीं, “देश के साथ संबंध” रखने की रही है। इसलिए नई दिल्ली संभवतः:

नई सरकार से तुरंत संपर्क बढ़ाएगी

आर्थिक परियोजनाओं को जारी रखने की कोशिश करेगी

सुरक्षा सहयोग बनाए रखने पर जोर देगी

निष्कर्ष

बीएनपी की संभावित जीत केवल बांग्लादेश की सत्ता परिवर्तन नहीं होगी, बल्कि दक्षिण एशिया की सामरिक राजनीति को प्रभावित कर सकती है।

भारत के लिए यह कूटनीतिक चुनौती भी होगी और अवसर भी—क्योंकि नई सरकार के साथ रिश्ते फिर से परिभाषित करने होंगे।

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