ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (NPS) दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं। सरकारी खजाने पर बोझ और कर्मचारियों की मांग के संदर्भ में इन दोनों की तुलना इस प्रकार की जा सकती है:
1. ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS)
विशेषताएँ:
यह डिफाइंड बेनेफिट पेंशन स्कीम थी, जिसमें रिटायरमेंट के बाद एक निश्चित राशि कर्मचारी को मिलती थी।
पेंशन कर्मचारी के अंतिम वेतन के 50% या तय न्यूनतम राशि के आधार पर मिलती थी।
इसमें महंगाई भत्ता (DA) समायोजित होता था, जिससे महंगाई बढ़ने पर पेंशन भी बढ़ती थी।
सरकार पूरी तरह से पेंशन राशि देती थी, कर्मचारी को इसके लिए कोई योगदान नहीं करना पड़ता था।
सरकारी खजाने पर प्रभाव:
सरकार को भारी वित्तीय बोझ उठाना पड़ता था, क्योंकि यह पूरी तरह टैक्सपेयर्स के पैसे से चलता था।
भविष्य में सरकारी वित्तीय स्थिरता के लिए यह चुनौतीपूर्ण होता गया, खासकर जब सरकारी कर्मचारियों की संख्या बढ़ी।
कर्मचारियों की पसंद:
आजीवन वित्तीय सुरक्षा और निश्चित आय की वजह से कर्मचारी इसे पसंद करते हैं।
NPS में मिलने वाली पेंशन बाजार पर निर्भर होती है, जबकि OPS में स्थिरता थी।
महंगाई भत्ता (DA) बढ़ने से पेंशन में भी बढ़ोतरी होती थी, जिससे जीवन यापन आसान होता था।
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2. न्यू पेंशन स्कीम / यूनिफाइड पेंशन स्कीम (NPS)
विशेषताएँ:
डिफाइंड कॉन्ट्रिब्यूशन स्कीम है, जिसमें कर्मचारी और सरकार दोनों का योगदान होता है।
कर्मचारी वेतन का 10% और सरकार 14% योगदान देती है।
पेंशन राशि शेयर बाजार और सरकारी बॉन्ड्स में निवेश होती है, जिससे रिटर्न निश्चित नहीं होता।
60% राशि रिटायरमेंट के समय निकाल सकते हैं और 40% से एन्युटी खरीदनी होती है, जिससे जीवनभर पेंशन मिलती है।
सरकारी खजाने पर प्रभाव:
सरकार को सीधे पेंशन देने की जरूरत नहीं होती, सिर्फ योगदान देना पड़ता है।
सरकार पर लंबी अवधि में वित्तीय बोझ कम होता है।
कर्मचारियों की दिक्कतें:
पेंशन बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करती है, इसलिए यह अनिश्चित होती है।
OPS जैसी जीवनभर स्थायी पेंशन की गारंटी नहीं होती।
DA जैसी कोई सुविधा नहीं होती, जिससे महंगाई के अनुसार पेंशन नहीं बढ़ती।
रिटायरमेंट के बाद पेंशन OPS की तुलना में कम होती है।
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OPS बनाम NPS: कौन बेहतर?
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निष्कर्ष:
सरकारी कर्मचारी OPS की बहाली चाहते हैं, क्योंकि इसमें उन्हें रिटायरमेंट के बाद स्थिर और आजीवन पेंशन मिलती है।
सरकार NPS को जारी रखना चाहती है, क्योंकि इससे उस पर वित्तीय बोझ कम पड़ता है।
कई राज्यों (राजस्थान, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, पंजाब) ने OPS बहाल कर दी है, लेकिन केंद्र सरकार इसे लागू करने के पक्ष में नहीं है।
अगर कर्मचारी की नजर से देखें तो OPS बेहतर है, लेकिन सरकार की नजर से देखें तो NPS ज्यादा व्यावहारिक है।
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